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12 वर्षो के लिए अपने थान में विराजमान हुई मां हरियाली

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रुद्रप्रयाग। नौ दिवसीय जात संपन्न होने के बाद मां भगवती हरियाली देवी 12 वर्षों के लिए अपने थान धारकोट में विराजमान हो गई है। आराध्य ने अपने पश्वा पर अवतरित होकर भक्तों व ध्याणियों को आशीर्वाद भी दिया।
बृहस्पतिवार को सुबह नौ बजे मंदिर में देवी प्रसाद बहुगुणा व विजय बहुगुणा ने मां हरियाली की विशेष पूजा-अर्चना की। देवी पश्वा प्रेम सिंह रौथाण ने आराध्य का श्रृंगार कर भोग लगाया। इसके बाद देवी मूर्ति को गर्भगृह से बाहर परिसर में लाया गया। यहां पर गायत्री शक्तियों से समाहित डोली में विराजमान किया गया। पूर्वाह्न 11 बजे देवी की डोली ने ढोल-दमाऊं व मशकबीन की थाप पर भक्तों के साथ अपने थान के लिए प्रस्थान किया। बीच में कालिंका मंदिर पहुंचने पर भगवती के दो स्वरूपों का मिलन हुआ। दोपहर सवा एक बजे मां हरियाली की डोली ने धारकोट पहुंचकर भक्तों और ध्याणियों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। शुभ मुहूर्त पर दो बजे आराध्य की मूर्ति को उसके थान पर विराजमान किया गया। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष सुरजीत सिंह रौथाण, कोषाध्यक्ष बीरेंद्र सिंह रौथाण, महामंत्री धीरेंद्र रौथाण, प्रमुख जगमोहन सिंह रौथाण, महावीर सिंह रौथाण, रवींद्र सिंह रौथाण, हरेंद्र सिंह रौथाण, विक्रम सिंह असवाल, नत्थी सिंह रौथाण, जगमोहन सिंह नेगी, महिला व युवक मंगल दल के पदाधिकारी व सदस्यों सहित ग्रामीण मौजूद थे।
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ढोल-दमाऊं वादकों को दी विदाई
हरियाली जात में नौ दिनों तक मंदिर में देव नृत्य व पूजा-अर्चना सहित अन्य धार्मिक क्रिया-कलापों में वाद्य यंत्रों के माध्यम से अहम भूमिका निभाने वाले ढोल, दमाऊं व मशकबीन वादकों को मंदिर समिति की ओर से टीके के साथ माल्यार्पण कर विशेष भेंट के साथ विदाई दी गई। ढोल वादक मंगलू लाल ने बताया कि वे आथित्य प्राप्त कर धन्य हो गए हैं।
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