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तीन वर्ष से सीएचसी जखोली में नहीं हुआ एक भी ऑपरेशन

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विनय बहुगुणा
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रुद्रप्रयाग। पीपीपी मोड में जाने के बाद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जखोली में आज तक एक भी ऑपरेशन नहीं हुआ है। अस्पताल सिर्फ खांसी, बुखार के मरीजों को दवा देने तक सीमित हो गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रतिमाह लाखों रुपये अस्पताल प्रबंधन दिया जाता है बावजूद मरीजों को यहां सुविधाएं नहीं मिल पा रही है।
10 अप्रैल 2014 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जखोली को पीपीपी मोड में संचालित किया गया। सील नर्सिंग होम प्राइवेट लिमिटेड बरेली को अस्पताल संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। तब, उम्मीद जगी थी कि जखोली ब्लाक के लोगों को अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के साथ ही स्वास्थ्य संबंधित सभी जांचे मुहैया होगी, लेकिन तीन वर्षों में अस्पताल ओपीडी तक सिमटकर रह गया है। जबकि स्वास्थ्य विभाग प्रतिमाह लाखों रुपये अस्पताल प्रबंधन को दे रहा है। सीएचसी में अल्ट्रासाउंड मशीन तक बंद पड़ी है। साथ ही अस्पताल में मानकानुसार 10 डाक्टर व 2 डीजीसीएमओ की तैनाती अनिवार्य है, लेकिन सिर्फ 4 डाक्टर हैं, जिसमें गाइनकोलॉजिस्ट एक दशक पूर्व सर्जरी केस छोड़ चुके हैं। फिजिशियन, रेडियोलॉजिस्ट, एनेथेस्टिक, जनरल सर्जन, ऑर्थो सर्जन के पद रिक्त पड़े हैं। बीते तीन वर्षों में ओटी में एक भी ऑपरेशन नहीं हुआ है। प्रसव हो चाहे पथरी या अन्य कोई ऑपरेशन से जुड़ा केस यहां हल नहीं हुआ है। जबकि इस दौरान यहां गंभीर बीमार व घायल लाए गए। लेकिन प्रबंधन की ओर से उन्हें सीधे हायर सेंटर रेफर किया गया है। अस्पताल की अव्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक की ओर से भी सील ग्रुप को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। सुधार न होने पर अनुबंध समाप्त करने की चेतावनी भी दी गई है। वहीं जनप्रतिनिधियों ने अस्पताल का संचालन श्रीनगर मेडिकल कालेज के अधीन किए जाने की मांग की है।
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बजट बढ़ा पर सुविधाएं सिफर
पीपीपी मोड सीएचसी जखोली को अप्रैल 2014 से दिसंबर 2016 तक स्वास्थ्य विभाग प्रतिमाह के हिसाब से 22 लाख रुपये की धनराशि दी गई। बताया जा रहा है कि इस वर्ष से यह राशि बढ़कर 26 लाख से अधिक हो गई है, लेकिन इसके बाद भी अस्पताल में न तो अल्ट्रासाउंड मशीन शुरू हो पाई न एक्स-रे ठीक हुआ। दूसरी तरफ पैरामेडिकल स्टाफ के 45 कर्मचारी भी न्यून मानदेय पर कार्य कर रहे हैं।
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अस्पताल की स्थिति काफी खराब है। निरीक्षण के दौरान काफी अव्यवस्थाएं देखने को मिली थी। जरूरी सुविधाओं के संचालन को लेकर अस्पताल प्रबंधन को पांच दिन का समय दिया गया है। अन्यथा कार्रवाई की जाएगी।
--- मंगेश घिल्डियाल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग
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