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2019 में सड़क से जुड़ेगा कालीमठ घाटी का आखिरी गांव चिलौंड

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रुद्रप्रयाग। सब कुछ ठीक रहा तो वर्ष 2019 में ऊखीमठ तहसील के कालीमठ घाटी का अंतिम गांव चिलौंड सड़क से जुड़ जाएगा। जिला योजना में गांव के लिए प्रस्तावित दो किमी सड़क को वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार से क्लीयरेंस मिल चुकी है। लोनिवि ने मार्ग का डिजायन तैयार कर लिया है। जल्द अंतिम सर्वेक्षण किया जाएगा।
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सेंचुरी एरिया में बसे चिलौड़ गांव के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। सड़क के अभाव में ग्रामीण को रोजमर्रा की खरीददारी के लिए 6 किमी दूरी नापनी पड़ रहा है, लेकिन अब, यह दूरस्थ गांव विकास की मूलधारा में शामिल हो जाएगा। जाल बैंड-चिलौड़ मोटर मार्ग निर्माण की कवायद शुरू हो गई है। करीब डेढ़ वर्ष पूर्व नेशनल वाइल्ड से स्वीकृति के बाद अब वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार ने भी अपनी हरी झंडी दे दी है। अब, भूमि लोनिवि के नाम हस्तांतरित की जाएगी। विभागीय अधिकारियों की मानें तो जल्द अंतिम सर्वेक्षण कर डीपीआर बनाकर शासन को भेजी जाएगी। मार्च 2019 तक मार्ग की सैद्धांतिक व वित्तीय स्वीकृति मिल जाएगी। जबकि अन्य औपचारिकताएं पूरी करते हुए अक्तूबर तक सड़क निर्माण पूरा कर दिया जाएगा। ग्राम प्रधान मोहन सिंह राणा ने मार्ग स्वीकृति के लिए केंद्र, राज्य सरकार सहित वन विभाग व लोनिवि का आभार जताया है।
बेटियों के सपने भी होंगे पूरे
रुद्रप्रयाग। चिलौड़ गांव की बेटियों के सपने भी पूरे हो सकेंगे। सड़क के अभाव में जूनियर के बाद आगे की पढ़ाई से वंचित बेटियां भी आने वाले वर्षों में हाईस्कूल, इंटर व उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगी। ग्रामीणों के अनुसार माध्यमिक स्कूल गांव से आठ किमी दूर होने के कारण गांव की अधिकांश बेटियां 8वीं के बाद पढ़ाई नहीं कर पा रही हैं।
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चिलौंड गांव को सड़क से जोड़ने के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से क्लीयरेंस मिल चुकी है। मार्ग का डिजायन व प्रारंभिक डीपीआर तैयार की जा चुकी है। अंतिम सर्वेक्षण का डीपीआर शासन को भेज दी जाएगी, इसके बाद सैद्धांतिक व वित्तीय स्वीकृति के बाद कार्य शुरू होगा।
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-- अनदीप राणा, सहायक अभियंता लोनिवि, ऊखीमठ
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