रुद्रप्रयाग। गौरीकुंड के व्यापारियों व ग्रामीणों ने इस वर्ष गौरी माई मंदिर के कपाट नहीं खोलने का निर्णय लिया है। साथ ही केदारनाथ यात्रा में कस्बे में दुकान, होटल, लॉज को बंद रखने और घोड़ा-खच्चर का संचालन न करने की बात कही है। उन्होंने प्रशासन की ओर से ध्वस्त किए गए निर्माणाधीन भवनों की भरपाई और गौरीकुंड को केडीए (केदारनाथ विकास प्राधिकरण) से अलग रखे जाने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दी है।
ग्राम प्रधान राकेश गोस्वामी की अध्यक्षता में हुई ग्रामीणों व व्यापारियों की संयुक्त बैठक में प्रशासन की ओर से बीते 18 व 20 फरवरी को कस्बे में निर्माणाधीन भवनों को ध्वस्त किए जाने का जमकर विरोध किया गया। ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि जून 2013 की आपदा के बाद से गौरीकुंड की सुध नहीं ली गई है। आपदा प्रभावित व्यवसायी जब स्वयं के प्रयास से अपने टूटे भवनों का पुनर्निर्माण कर रहे हैं, तब प्रशासन सरकारी भूमि में अतिक्रमण बताकर उन्हें ध्वस्त कर रहा है, जो सही नहीं है। कहा कि जिस तरह से तानाशाह की तरह एसडीएम ने उनके निर्माणाधीन भवन तुड़वाए हैं, उससे वे आहत हैं। बैठक में सर्व सम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि कि इस बार गौरीकुंड स्थित गौरीमाई मंदिर के कपाट नहीं खोले नहीं जाएंगे। साथ ही केदारनाथ यात्रा के पहले दिन से कस्बे में होटल, लॉज, रेस्टोरेंट, ढाबा व दुकानें पूर्णरूप से बंद रखी जाएगी। यहां तक कि कस्बे से धाम के लिए घोड़ा-खच्चरों का संचालन भी नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने केदारनाथ विकास प्राधिकरण का जमकर विरोध किया। बैठक में बीरेंद्र प्रसाद, अरविंद गोस्वामी, अनूप गोस्वामी, चंपा देवी, नामी देवी, कल्पेश्वरी देवी, बीरा देवी, विमला देवी, उर्वी दत्त, मायाराम गोस्वामी, टीकाराम, उर्मिला देवी, विजया देवी, दीपा देवी, चंडी प्रसाद, रेखा देवी, अंजू देवी आदि मौजूद थे।