गुप्तकाशी। केदारघाटी के नारायणकोटी गांव में अब पांडव नृत्य में पशुबलि नहीं होगी। अभिमन्यु के पात्र की पहल पर ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से पशुबलि बंद करने का निर्णय लिया है।
ग्राम पंचायत नारायणकोटी में पांडव नृत्य का इतिहास काफी प्राचीन है। बुुजुर्गों के अनुसार यहां दो सौ वर्षों से प्रत्येक आठ वर्ष में पांडव नृत्य होता है। 32 दिवसीय आयोजन में महाभारत काल की लीलाओं, वाण निकालना, गैंडा कौथिग, मोरोद्वार, पैंया डाली, चक्रव्यूह, कमलव्यूह व सुभद्रा विवाह सहित अन्य लीलाओं का मंचन होता है। इस दौरान चक्रव्यूह में कौरवों द्वारा अभिमन्यु को मारने पर चार से अधिक बकरियों की बलि दी जाती है। यह परंपरा कई गांवों होती आ रही है, लेकिन नारायणकोटी गांव में इसे पूर्णतया बंद कर दिया है। यह अभिमन्यु के पात्र की पहल पर हुआ है। बीते 28 दिसंबर को पांडव नृत्य के तहत गांव में चक्रव्यूह का मंचन किया गया। पांडवों के पुत्र अभिमन्यु का अभिनय करने वाले प्रदीप पुजारी ने ग्रामीणों को सुझाव दिया कि पांडव नृत्य में पशुबलि नहीं की जाए। इस पर लंबे विचार-विमर्श के बाद सभी ग्रामीणों ने सहमति जताई। आयोजन समिति अध्यक्ष सच्चिदानंद पुजारी ने बताया कि पांडव नृत्य के साथ ही अन्य सामाजिक व धार्मिक आयोजन में पशुबलि बंद कर दी गई है। प्रयास होगा कि क्षेत्र के अन्य गांवों में भी पशुबलि को बंद कराया जाए।