रुद्रप्रयाग। केदारघाटी में मंदाकिनी पर निर्माणाधीन 76 मेगावाट की ब्यूंग-फाटा जल विद्युत परियोजना संकट में आ गई है। कार्य में तेजी न होने और सरकारी नियमों की अवहेलना पर बैंकर्स ने कंपनी के वित्तीय खाते पर रोक लगा दी है, जिससे कंपनी रोक हटने तक परियोजना का कार्य बंद करने जा रही है। ऐसे में यहां कार्य करने वाले अधिकारी/कर्मचारियों के साथ करीब 300 मजदूरों को आर्थिक संकट से जूझना पड़ सकता है।
टाइम मैनेजमेंट और वर्क प्रोगेस अपेक्षा के अनुरूप नहीं होने और रिटर्न में हो रही देरी के कारण देशभर में 12 हाइड्रो प्रोजेक्ट कंपनियों के वित्तीय खातों को संबंधित बैंकर्स ने नो परफॉरमिंग ऐसेट्स (एनपीए) घोषित किया है, जिसमें ब्यूंग-फाटा परियोजना की कार्यदायी संस्था लैंको इंफ्राटेक लिमिटेड भी शामिल है। कंपनी पर लगी वित्तीय रोक से 11 हजार करोड़ से अधिक लागत तक पहुंच चुकी 76 मेगावाट की ब्यूंग-फाटा जल विद्युत परियोजना अधर में लटक गई है। ऐसे में मार्च 2018 तक परियोजना का कार्य पूरा होना अब संभव नहीं है।
वर्ष 2007-08 में 448 करोड़ की लागत से शुरू हुई इस जल विद्युत परियोजना को अक्तूबर 2014 में पूरा होना था। 7 वर्ष में पूरी होने वाली इस परियोजना के लिए लैंको द्वारा रामपुर और ब्यूंग गांव के कुछ परिवारों से भूमि खरीदी गई। सरकारी भूमि को नियमों के तहत स्थानांतरित कर परियोजना के नाम किया गया। परियोजना के लिए 9.2 किमी की लंबी सुरंग बनाई गई है। इस सुरंग के ऊपर केदारघाटी के 11 गांव बसे हैं। रन ऑफ रिबर आधारित परियोजना से 76 मेगावाट बिजली उत्पादन होना था, लेकिन 16/17 जून 2013 की केदारनाथ आपदा में परियोजना के डैम और सुरंग को व्यापक क्षति पहुंची थी। तब, कंपनी को ढाई सौ करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ था। परियोजना का पूरा होने का समय मार्च 2018 तय किया गया था। इन कारणों के चलते परियोजना की लागत में भी वृद्धि होती रही। 10 वर्ष में परियोजना की लागत ढाई गुना बढ़कर 11 हजार करोड़ को पार कर चुकी है, जबकि परियोजना का लगभग 18 फीसदी कार्य होना शेष है। अब, बैंकर्स द्वारा सरकारी नियमों के उल्लंघन के चलते लैंको हाइड्रो इंफ्राटेक को एनपीए घोषित कर वित्तीय रोक लगा दी है, जिससे परियोजना का काम ठप हो जाएगा। यह रोक कब तक रहेगी, इसे लेकर स्पष्ट नहीं है। वित्तीय रोक से परियोजना में कार्य करने वाले मजदूर सबसे अधिक प्रभावित होंगे। मैजेटमेंट के अनुसार जल्द छटनी कर करीब 2 सौ मजदूरों को हटाया जा सकता है।
इनका कहना है -
कार्य की प्रगति धीमी रहने के चलते बैंकर्स ने लैंको हाइड्रो प्रोजेक्ट के खातों पर वित्तीय रोक लगाई है। कंपनी के इस प्रोजेक्ट को चार बैंक फाइनेंस कर रहे थे, जो मुंबई और आद्र प्रदेश के हैं। कंपनी के उच्च प्रबंधन द्वारा प्रोजेक्ट पर वित्तीय रोक लगने की सूचना दी है, जिसके तहत कार्य बंद करना पड़ रहा है, जिससे कम से कम 2 सौ मजदूरों को हटाना पड़ेगा। - राजेश राय, वरिष्ठ प्रबंधन ब्यूंग-फाटा हाइड्रो प्रोजेक्ट
बैंकर्स द्वारा लैंको के प्रोजेक्ट लगाई गई वित्तीय रोक से क्षेत्र के 10 से अधिक गांवों के 2 सौ से अधिक लोग सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं, जिनका रोजगार परियोजना से जुड़ा है। रोक को हटाने को लेकर कंपनी प्रबंधन को बैंकर्स के सामने अपनी बात मजबूती से रखनी चाहिए। - संजय जमलोकी, क्षेत्र पंचायत सदस्य रविग्राम