रुद्रप्रयाग। प्रधानमंत्री के महत्वकांक्षी ड्रीम प्रोजेक्ट नमामि गंगे परियोजना में शामिल केदारनाथ धाम में कई कार्य प्रस्तावित हैं, लेकिन तीन वर्ष बाद भी कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। यहां आपदा में बहे प्राचीन कुंडों का पुनरुद्धार होना था, लेकिन कार्रवाई सर्वेक्षण से आगे नहीं बढ़ पाई है।
16/17 जून 2013 की आपदा मेें केदारनाथ में हुई तबाही में यहां स्थित प्राचीन कुंड भी तबाह हो गए थे। मार्च 2014 के बाद धाम में शुरू हुए पुनर्निर्माण कार्यों के अंतर्गत नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की ओर से मंदिर मार्ग पर उदक कुंड को मलबे के ढेर से खोज निकाला गया था। वहीं, मंदिर के पीछे अमृत कुंड भी सुरक्षित पाया गया, लेकिन हंस, रेतस सहित तीन कुंडों का आज तक कोई पता नहीं चल पाया है। वर्ष 2016 में शुरू हुई नमामि गंगे परियोजना में केदारनाथ को भी शामिल किया गया, जिसके तहत केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने विशेषज्ञों के साथ केदारनाथ धाम पहुंचकर दो बार सर्वेक्षण भी किया। बावजूद आज तक कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। केदारनाथ के वयोवृद्घ तीर्थ पुरोहित श्रीनिवास पोस्ती बताते हैं, कि धाम में आपदा से पूर्व में मौजूद प्राचीन कुंडों में विशेष पूजा व कर्मकांड की परंपराओं का निर्वहन किया जाता था, लेकिन आपदा के मलबे में ध्वस्त हुए कुंडों को पुनर्जीवित करने के लिए कोई पहल नहीं की जा रही है। दूसरी ओर केदारनाथ आपदा में प्रभावितों को अहेतुक व मुआवजा राशि का मुद्दा पांच वर्ष बाद भी प्रदेश सरकारें नहीं सुलझा पाई हैं। जबकि अगस्तयमुनि-विजयनगर के प्रभावित भवन स्वामी भी मुआवजे के लिए शासन-प्रशासन के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।
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प्राचीन कुंडों के पुनरुद्धार को लेकर कार्ययोजना तैयार कर दी गई है। डीपीआर फाइनल होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।
अमित शर्मा , परियोजना के प्रबंधक