रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम में मौसम की निगरानी के लिए आरसीसी सुरक्षा दीवार पर चार वॉचिंग टावर बनाए गए हैं। तेज बरसात या विषम परिस्थितियों में इन टॉवर पर जवान तैनात किए जाएंगे, जो धाम में तैनात प्रशासन व अन्य अधिकारियों/कर्मचारियों को मौसम की पलपल की स्थितियों से अवगत कराते हुए हाई अलर्ट करेंगे, जिससे सुरक्षा व सतर्कता को लेकर कम से कम समय में पुख्ता इंतजाम किए जा सके।
जून 2013 की आपदा के बाद से केदारनाथ धाम को सुरक्षित करने के साथ मजबूत भी किया जा रहा है। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की ओर से मंदिर व केदारपुरी की सुरक्षा के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा दीवार (गेबिन, रॉक-नेट व आरसीसी) बनाई गई हैं। इन दीवारों में तीसरी 350 मीटर लंबी और 6 मीटर ऊंची आरसीसी दीवार पर समान दूरी पर 4 वॉचिंग टावर बनाए गए हैं। इन टॉवर से जहां पूरी केदारपुरी का निगरानी हो सकेगी। वहीं, तेज बरसात व अन्य विषम परिस्थितियों में टॉवर से मंदाकिनी व सरस्वती नदी के जलस्तर सहित चौराबाड़ी ताल क्षेत्र पर नजर रखी जा सकेगी। इन टॉवर को जौनसार के हस्तशिल्पियों के द्वारा देवदार की लकड़ी के बनाए गए चबुतरा, खंभ और जंगला से सजाया गया है, जो सुरक्षा दीवार को एक नया स्वरूप भी प्रदान कर रहे हैं। निम के अनुसार आगामी यात्रा में बरसाती सीजन में इन टॉवर पर नियमित रूप से जवानों की ड्यूटी रहेगी, जो यहां से हिमालय क्षेत्र और दोनों नदियों के जलस्तर के बारे में कंट्रोल रूप में नियमित जानकारी देते रहेंगे।
श्रद्धालु कर सकेंगे केदारपुरी का दीदार
इस वर्ष केदारनाथ यात्रा में बाबा केदार के भक्त मंदिर के पीछे बनी आरसीसी दीवार पर भगवान शिव के विभिन्न रूपों की थ्री-डी पेंटिंग से रूबरू होंगे। निम की ओर से बीते वर्ष 10 से अधिक पेंटिंग दीवार पर लगाई गई हैं। साथ ही दीवार के टॉप पर बनाए गए चार वॉचिंग टावर से श्रद्धालु संपूर्ण केदारपुरी के संपूर्ण दर्शन भी कर सकेंगे।
केदारनाथ में सुरक्षा के साथ सतर्कता के सभी इंतजाम किए गए हैं। इसी के तहत आरसीसी दीवार पर टॉवर बनाए गए हैं, जिन्हें एंटी फ्लड वॉचिंग टावर कहा जाता है। इन टॉवर में खड़े होकर विषम परिस्थितियों में लोगों को अलर्ट किया जा सकता है।
--- कर्नल अजय कोठियाल, प्राचार्य नेहरू पर्वतारोहण संस्थान उत्तरकाशी