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भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता व रोजगार सृजन को सड़क पर उतरे युवा

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अगस्त्यमुनि। रोजगार सृजन और प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही धांधली और धोखाधड़ी रोकने की मांग को लेकर शिक्षित बेरोजगार संघ ने प्रदर्शन किया। संघ ने ‘लिखते-लिखते मेरी कलम तक घिस गई’ ‘नौकरी कैसे मिले, जब नौकरी ही बिक जाए’.. आदि नारों के साथ शिक्षित बेरोजगार संघ ने मुख्य बाजार से लेकर विजयनगर तक प्रदर्शन किया।
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जुलूस - प्रदर्शन के उपरांत सभा को संबोधित करते हुए प्रदर्शन के संयोजक अंकित पुरोहित ने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद से प्रदेश सरकारें रोजगार को लेकर पारदर्शी व्यवस्था नहीं बना पाई हैं, जिसका खामियाजा युवाओं को भुगतना पड़ रहा है। कहा कि दिनोंदिन चुनाव के समय बेरोजगारी को मुद्दा बनाने वाली सरकारें युवाओं को भूल जाती हैं। हैप्पी असवाल ने कहा कि युवा पहाड़ में नौकरी करना चाहता है, लेकिन धांधली व धोखाधड़ी के चलते प्रतियोगी परीक्षाएं स्थगित हो रही है, जिससे युवा निराश हो रहे हैं। लक्ष्मण रावत, कुलदीप रावत, नीलम, प्रियंका आदि का कहना था कि सरकार में शामिल मंत्रियों व विधायकों के चहेतों को रखने के लिए भर्तियों को रद्द कर उपनल व बैकलॉग के जरिए पदों को भरा जा रहा है, जो शिक्षित युवाओं के साथ अन्याय है। अन्य वक्ताओं का कहना था कि रोजगार के नाम पटवारी भर्ती घोटला प्रदेश के युवाओं के साथ सबसे बड़ा मजाक है। साथ ही बीते दिनों फारेस्ट गार्ड व उद्यान विभाग की भर्ती परीक्षा के फार्म भरवाने के बाद स्थगित करना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि युवा वर्षों से रोजगार की आश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन हर बार प्रतियोगी परीक्षाओं को धांधली व अन्य कारणों से स्थगित कर उनके मनोबल को तोड़ा जा रहा है। प्रदर्शन में केदारघाटी के शिक्षित डिग्रीधारी युवा/युवती बैनर, पोस्टर व स्लोगन के साथ शामिल हुए।
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