ऊखीमठ। द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर की चल उत्सव विग्रह डोली अपने दूसरे रात्रि प्रवास के लिए बृहस्पतिवार को राकेश्वर मंदिर रांसी पहुंची। 25 नवंबर को उत्सव डोली अपने शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में विराजमान होगी।
गौंडार गांव में मुख्य पुजारी राजशेखर लिंग ने भगवान मद्महेश्वर की भोग मूर्ति की पूजा अर्चना के साथ ही अभिषेक पूजा, बाल भोग व पूर्ण भोग लगाकर आरती उतारी। इस मौके पर ग्रामीणों ने भी भगवान को अर्घ्य लगाकर दर्शन किए। सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर भगवान की चल उत्सव विग्रह डोली ने गौंडार गांव से शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान किया। ग्रामीण अपने आराध्य को विदा करने के लिए घरों से दो किमी दूर तक पहुंचे। इस दौरान कई लोग भावुक भी हो गए। छह किमी की यात्रा तय कर आराध्य भगवान की डोली दोपहर एक बजे रांसी गांव के राकेश्वरी मंदिर पहुंची, जहां मंदिर के पुजारी ने विशेष पूजा-अर्चना कर अभिषेक किया। इस मौके पर चल विग्रह डोली का पुष्प-अक्षत के साथ स्वागत किया गया। साथ ही सामूहिक अर्घ्य भी लगाया। मंदिर के पुजारी भगवती प्रसाद ने बताया कि शाम को भगवान मद्महेश्वर व राकेश्वरी देवी की सायंकालीन आरती संयुक्त रूप से की गई। शुक्रवार को मद्महेश्वर भगवान की डोली गिरिया गांव पहुंचेगी, जहां लोग स्वागत तैयारियों में जुटे हैं।