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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन निर्माण के लिए पेड़ों का कटान शुरू

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विनय बहुगुणा
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रुद्रप्रयाग। 126 किमी लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग नई ब्रॉड गेज रेल लाइन परियोजना के निर्माण के लिए पेड़ों का कटान शुरू हो गया है। निर्माण के लिए जिले में दो हजार पेड़ काटे जाएंगे। साथ ही पांच-छह माह में धारी देवी, खांकरा और सुमेरपुर में प्रस्तावित सुरंगों के एडिट (प्रवेश द्वार) के निर्माण की कार्रवाई भी शुरू हो जाएगी।
महत्वकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के निर्माण के लिए अधिगृहित भूमि का सीमांकन कर रेलवे विकास निगम ने अपना कब्जा कर दिया है। साथ ही रेल लाइन के निर्माण को लेकर दूसरे चरण के कार्य शुरू कर दिए गए हैं। इसके तहत इन दिनों वन विकास निगम के माध्यम से ऋषिकेश से लेकर कर्णप्रयाग तक चरणबद्ध तरीके से पेड़ों का कटान शुरू कर दिया गया है। रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के अंतर्गत सुमेरपुर में पेड़ों का कटान किया जा रहा है। यहां खांकरा व रुद्रप्रयाग रेंज में करीब 2000 पेड़ों का कटान होना है। जबकि केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के अंतर्गत चमोली जनपद में कमेड़ा से कालेश्वर तक 500 से अधिक पेड़ों का कटान किया जाना है, जिनका छपान हो चुका है। दूसरी तरफ रेल लाइन में बनने वाली सभी 16 सुरंगों के निर्माण की कार्रवाई आगामी अप्रैल-मई से शुरू हो जाएगी। अधिकारियों के अनुसार सुरंग के एडिट निर्माण के लिए मार्च से मशीनों की खेप पहुंचनी शुरू हो जाएंगी। विदेशी तकनीक से बनने वाली टनल के डिजायन भी तैयार हो चुके हैं। रेलवे विकास निगम द्वारा रेल लाइन के अंतिम स्टेशन सिवाई (कालेश्वर) के पुल का डिजायन फाइनल कर दिया गया है। जबकि शिवपुरी, चौरास, धारी, गौचर और रानो में प्रस्तावित पुलों के निर्माण के लिए यहां सामग्री पहुंचाने के लिए संपर्क मार्गों का कार्य प्रगति पर है।
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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन निर्माण का कार्य अगले छह माह में धरातल पर नजर आने लगेगा। पहाड़ के चार जनपदों में पेड़ों का कटान शुरू कर दिया गया है। टनल व ब्रिज निर्माण की कार्रवाई अप्रैल-मई से शुरू होगी। निर्माण सामग्री के साथ जरूरी मशीनें जल्द स्थानों पर भेजी जाएंगी।
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-- बीपी बडोगा, डीजीएम श्रीनगर प्रोजेक्ट आरबीएलएल
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भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के फॉरेस्ट एक्ट 1980 के तहत किसी भी योजना के निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण से पूर्व चिह्नित पेड़ों (जो काटे जाएंगे) का दोगुना मुआवजा पहले ही वन विभाग को जमा करना होता है। इस प्रक्रिया को क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण कहा जाता है। इसके अलावा वन विभाग द्वारा अपने अलग-अलग वन क्षेत्र या पेड़ का एनपीवी (नेट परसेंट वैल्यू) निर्धारित रहता है। उसके हिसाब से भी अलग धनराशि जमा करनी होती है। रेलवे विभाग द्वारा रेल ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन निर्माण के लिए ये सभी प्रक्रियाएं पहले ही पूरी कर दी गई हैं।
-- एके शर्मा, डीजीएम टेक्निकल सिविल, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन प्रोजेक्ट
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