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कालीमठ घाटी के कबिल्ठा गांव के मानवेंद्र रावत शहीद

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रुद्रप्रयाग। ऊखीमठ ब्लाक के अंतर्गत कालीमठ घाटी के कबिल्ठा गांव के लाल मानवेंद्र सिंह रावत सीमा पर दुश्मनों का मुकाबला करते हुए शहीद हो गए। छह गढ़वाल रायफल में सूबेदार मेजर पद पर कार्यरत मानवेंद्र इन दिनों जम्मू कश्मीर के बांदीपुरा में तैनात थे। शहीद सैनिक का पार्थिव शरीर शुक्रवार सुबह सेना के हेलीकाप्टर से जौलीग्रांट हवाई पट्टी पर पहुंचेगा और वहां से गौचर हवाई पट्टी पर लाया जाएगा। मानवेंद्र की शहादत की खबर मिलने के बाद उनके माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। मायके गई उनकी पत्नी को भी वापस कबिल्ठा बुलाया गया। वे भी बेसुध पड़ी हैं।
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बांदीपुरा में तैनात शहीद मानवेंद्र के साथ तैनात सूबेदार मेजर नरेंद्र सिंह ने बताया कि सीमा पर बुधवार रात करीब साढ़े दस बजे मुठभेड़ शुरू हो गई थी। दोनों तरफ से फायरिंग हो रही थी। दुश्मन का कड़ा मुकाबला करते हुए मानवेंद्र और अन्य जवानों ने दो आतंकियों को मार गिराया। तभी एक के बाद एक दो गोलियां मानवेंद्र को जा लगी, जिससे वह बुरी तरह से लहूलुहान हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया। यहां लाख कोशिशों के बाद भी उन्हें नहीं बचाया जा सका। सेना की ओर से बृहस्पतिवार तड़के मानवेंद्र के घर फोन कर उनके परिजनों को घटना की सूचना दी गई।

अस्पताल से माता-पिता और पत्नी से की अंतिम बार बात
रुद्रप्रयाग। बांदीपुर में आरआर में ड्यूटी दे रहे मानवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार को शहादत से पहले करीब 8.30 बजे अपने पिता नरेंद्र सिंह रावत, मां कमला देवी और मायके गई पत्नी विनीता सहित दोनों बच्चों से फोन पर बातचीत की। घर परिवार में सबकी कुशलक्षेम पूछने के साथ ही मानवेंद्र ने बताया था कि इन दिनों वहां काफी तनाव है। सीमा पर लगातार फायरिंग हो रही है, जिससे निरंतर खतरा बना हुआ है। इसके बाद रात करीब 11.30 बजे मानवेंद्र आतंकी मुठभेड़ में बुरी तरह जख्मी हो गए। उन्हें सेना के अस्पताल लाया गया, जहां से उन्होंने अपनी पत्नी और माता-पिता से आखिरी बार बात की। इसके बाद देर रात करीब 3.30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। ब्यूरो
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पिता से प्रेरणा लेकर भर्ती हुए थे फौज में
रुद्रप्रयाग। शहीद मानवेंद्र के चाचा दिलवर सिंह रावत ने बताया कि फौजी पिता नरेंद्र सिंह से प्रेरणा से लेते हुए मानवेंद्र इंटर पास करते ही वर्ष 2007 में सेना में भर्ती हो गए। सात भाई-बहनों में तीसरे मानवेंद्र का विवाह 2011 में रामपुर-बडासू निवासी विनीता से हुआ। उनकी पांच वर्ष की बेटी और तीन वर्ष का बेटा है। करीब चार वर्ष पूर्व उन्होंने देहरादून के नगरौंदा में जमीन खरीदकर वहां मकान भी बना लिया था। तीज-त्यौहार व घर-परिवार के छोटे-बड़े कार्यों में मानवेंद्र परिवार सहित शामिल होते रहे। वह बीते मई माह में ही 15 दिन की छुट्टी पर घर आए थे। ग्राम प्रधान विनोद रावत ने बताया कि गांव ने अपना होनहार बेटा खो दिया है। ब्यूरो

दादा-दादी, मां तुम रो क्यों रहे हो..
मानवेंद्र सिंह के दोनों बच्चे जान्हवी और अनुराग घर के माहौल को देखकर अपनी मां और दादा-दादी से बार-बार सवाल पूछ रहे हैं कि तुम रो क्यों रहे हो। मोबाइल पर अपने पिता की फोटो को देख रहे हैं।
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