रुद्रप्रयाग। महिला बैंक के नाम पर धोखाधड़ी करने वाली एक संस्था की महिला को न्यायिक मजिस्ट्रेट आरती सरोहा ने तीन साल की कैद और एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अगस्त 2014-15 में अगस्त्यमुनि के गबनी गांव (चंद्रापुरी) में महिला ग्रामीण जन विकास संस्था के नाम से महिला स्वयं सहायता समूह खोला गया था। वादी, सरस्वती देवी को बैंक में को-आर्डिनेट के पद पर रखा गया। साथ ही पांच कार्यकर्ता भी तैनात किए गए। समूह के अध्यक्ष मोहन लाल शाह और सचिव मंजू देशवान ने महिला को 18 हजार रुपये मानदेय और 1000 खाते खुलवाने पर छह हजार रुपये अतिरिक्त देने की बात कही। इस आधार पर पर समूह से ग्रामीण महिलाएं जुड़ती गई, जिससे काफी मात्रा में धनराशि जमा होने लगी। इस दौरान अध्यक्ष शाह व सचिव देवशान महिलाओं से 21 लाख रुपये ले चुके थे। ऐसे में ग्रामीण महिलाएं अपने जमा रुपये की छानबीन करने लगी, लेकिन 17 फरवरी को मोहन शाह ने आत्महत्या कर दी। स्थिति यह रही कि संस्था द्वारा न लाभकारी योजनाएं बनाई गई और न ही कोई रोजगार व आर्थिक सहायता प्रदान की गई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपी मंजू देशवान को आईपीसी की धारा 420 के तहत दोषी पाते हुए सजा सुनाई। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक अभियोजन अधिकारी सुदर्शन चौधरी और उदय जगवाण ने पैरवी की।
40 लाख का गबन करने वाले को तीन साल की कैद
रुद्रप्रयाग। आपदा के दौरान गौरीकुंड में प्रीपेड काउंटर पर कैश कलेक्शन एवं वितरण व्यवस्था के लिए तैनात एक व्यक्ति को 40 लाख के गबन के आरोप में प्रभारी न्यायिक मजिस्ट्रेट संजय सिंह ने तीन साल का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। मामले की पैरवी करते हुए अभियोजन अधिकारी विपुल पांडेय एवं सुदर्शन चौधरी ने की। उन्होंने न्यायालय को बताया कि अभियुक्त प्रकाश गोस्वामी ने 40 लाख की धनराशि न तो सरकारी खाते में जमा कराई और न ही प्रतिस्थानी गुमान सिंह को चार्ज देते समय दी, बल्कि स्वयं को आपदा में गायब होना दर्शित किया। इस पर प्रभारी न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी को सरकारी धन के गबन का आरोपी पाते हुए तीन वर्ष की जेल व पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।