रुद्रप्रयाग। राज्य पुष्प ब्रह्मकमल और दुर्लभ अन्य जड़ी-बूटियों के संरक्षण के लिए शासन स्तर पर कवायद शुरू हो गई है। ग्रीष्मकाल में केदारनाथ क्षेत्र में भेड़-बकरियों व अन्य मवेशियों के चुगान पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब, चारवाहे रामाबाड़ा से आगे अपने मवेशियों को नहीं ले जा सकेंगे।
उत्तराखंड शासन मध्य हिमालय क्षेत्र में मिलने वाले राज्य पुष्प सहित दुर्लभ जड़ी-बूटियों और बुग्याली घास के संरक्षण के लिए वन विभाग को योजना बनाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने बीते मंगलवार जिला प्रशासन को केदारनाथ यात्रा में ग्रीष्म व बरसाती सीजन में क्षेत्र में भेड़-बकरियों के चुगान पर प्रतिबंध लगाने को कहा है। उन्होंने दुर्लभ पुष्प व औषधीय पादपों के संरक्षण के लिए वृहद स्तर पर ठोस कार्य करने को कहा। इधर, डीएम मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि यात्राकाल में चरवाहों को रामाबाड़ा से आगे नहीं जाने दिया जाएगा। इसके अलावा केदारनाथ से ऊपरी तरफ पर्यटकों को बिना अनुमति के नहीं जाने दिया जाएगा। साथ ही ब्रह्मकमल को सिर्फ मंदिर में बाबा केदार की पूजा-अर्चना के लिए दोहन किया जाएगा। अन्य कोई भी किसी प्रकार से दोहन नहीं करे, इसके लिए वन विभाग के अधिकारियों के साथ जल्द बैठक कर कार्ययोजना तैयार की जाएगी। दूसरी तरफ केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ अमित कंवर ने बताया कि ब्रह्मकमल के संरक्षण के लिए जरूरी प्रयास किए जाएंगे। बीते दो वर्षों में मध्य हिमालय के केदारनाथ, हेमकुंड और बदरीनाथ क्षेत्र में ब्रह्मकमल का अधिक दोहन हुआ है।