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खतरे की जद में तृतीय केदार तुंगनाथ धाम का मंदिर

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रुद्रप्रयाग। तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के प्राचीन मंदिर पर खतरा मंडरा रहा है। यहां मुख्य मंदिर की दीवारों पर कई जगहों पर दरारें पड़ रही हैं। दीवार के कटवा पत्थर अपनी जगह छोड़ रहे हैं। मुख्य द्वार के पास की दीवार सबसे अधिक संवेदनशील बनी है, जिससे निरंतर खतरा बढ़ रहा है। जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला पर्यटन अधिकारी ने मंदिर का निरीक्षण किया है।
समुद्रतल से 3680 मीटर (12073 फीट) की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ के प्राचीन मंदिर पर खतरा मंडरा रहा है। आदिगुरु शंकराचार्य काल में निर्मित इस मंदिर की दीवारों पर दरारें पड़ रही हैं, जो कभी भी किसी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकती हैं। मंदिर का निरीक्षण कर लौटे जिला पर्यटन अधिकारी सुशील नौटियाल ने बताया कि मुख्य मंदिर के सभामंडप की दीवार में ज्यादा दरारें पड़ी हैं। अन्य दीवारों पर भी अलग-अलग जगहों पर हल्की दरारें हैं। अगर, जल्द मरम्मत नहीं की गई तो, ये दरारें बढ़ भी सकती हैं। इस संबंध में जिला प्रशासन को भी अगवत करा दिया गया है। उन्होंने मंदिर का संरक्षण एडीबी सर्किट के तहत करने के लिए भारतीय पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों के साथ पुन: निरीक्षण की बात भी कही।
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मंदिर के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित का कहना है कि मंदिर की सुरक्षा और देखरेख को लेकर लंबे समय से शासन-प्रशासन को अवगत कराया जा रहा है, लेकिन सुध नहीं ली जा रही है। मठापति राम प्रसाद मैठाणी, सुबोध मैठाणी आदि का कहना है कि तृतीय केदार तुंगनाथ धाम निरंतर उपेक्षा की जा रही है। जून 2013 की आपदा के बाद भी यहां शासन-प्रशासन के आला अधिकारी नहीं पहुंचे हैं। जल्द मंदिर के संरक्षण को ठोस प्रयास नहीं किए गए तो, मंदिर की दीवारों के कटवा पत्थर कभी भी भरभरा कर ढह सकते हैं। उन्होंने केदारनाथ धाम की तर्ज पर तृतीय केदार तुंगनाथ मंदिर की दीवारों की एएसआई के जरिए मरम्मत की मांग की है।

बिजली और पानी का भी नहीं इंतजाम
रुद्रप्रयाग। तृतीय केदार तुंगनाथ धाम में राज्य निर्माण के 17 वर्ष बाद भी शासन, प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा जरूरी सुविधाएं जुटाने का प्रयास नहीं किया गया है। चोपता से करीब साढ़े किमी दूरी पर बसे मंदिर में बिजली की कोई सुविधा नहीं हैं। यहां छिल्ले (भीमल की लकड़ी) की रोशनी में आराध्य की पूजा होती है। पेयजलकी भी व्यवस्था नहीं है। यात्राकाल में मंदिर में रहने वाले लोगों को डेढ़ किमी दूर से पानी जुटाना पड़ता है। संचार और सफाई व्यवस्था भी भगवान भरोसे है। ऐसे में श्रद्धालुओं को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। करीब सात वर्ष पूर्व मंदिर में हुई चोरी का भी आज तक सुराग नहीं लग पाया है। बावजूद मंदिर की सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं हैं। शीतकाल में मंदिर की सुरक्षा दो सुरक्षा गार्डों के भरोसे रहती है, जो रात को चोपता पहुंच जाते हैं।
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इनका कहना है --
तुंगनाथ मंदिर के संरक्षण के लिए जल्द कार्रवाई शुरू की जाएगी। मंदिर की दीवारों को पहुंच रही क्षति की प्रारंभिक रिपोर्ट मिल चुकी है। इस संबंध में विशेषज्ञों से भी राय लेकर बीकेटीसी के माध्यम से कार्य किया जाएगा।
--- मंगेश घिल्डियाल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग
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