ऊखीमठ/गुप्तकाशी/अगस्त्यमुनि/तिलवाड़ा। ऊखीमठ ब्लाक के तुंगनाथ घाटी के दैड़ा, मस्तूरा सहित आकाशकामिनी नदी किनारे बसे गांवों किनारे दो से ढाई फीट तक बर्फबारी हो चुकी है, जबकि अन्य गांवों में चार फीट तक बर्फ जम चुकी है। यहां स्कूल परिसर भी लकदक हो चुके हैं। क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार इस तरह की बर्फबारी होती देखी है।
समुद्रतल से लगभग साढ़े तीन से चार हजार फीट की ऊंचाई पर बसे दैड़ा, कांडा, बरंगाली, हुड्डू, उषाड़ा सहित सारी, पेंज, करोखी, मक्कूमठ, दिलमी, मस्तूरा सहित दो दर्जन से अधिक गांवों सफेद चादर से ढक चुके हैं। उषाड़ा के पूर्व ग्राम प्रधान प्रदीप बजवाल ने बताया कि अपने जीवन के 40 वर्षों में होश संभालने के बाद से उन्होंने इस तरह की बर्फबारी पहली बार देखी है। स्थिति यह है कि आकाशकामिनी नदी के किनारे स्थित राजकीय इंटर कालेज दैड़ा का परिसर भी बर्फ भी लकदक है। उधर, भगवान शिव-पार्वती की विवाह स्थली त्रियुगीनारायण गांव सहित मंदिर में करीब साढ़े तीन फीट बर्फ जम चुकी है। सोनप्रयाग-त्रियुगीनारायण मोटर मार्ग सहित यहां गावं के अन्य संपर्क मार्ग भी बर्फ से बंद हो चुके हैं। स्थानीय वयोवृद्ध परशुराम गैरोला, आशीष गैरोला, ग्राम प्रधान विजय लाल आदि ने बताया कि दिनभर केदारनाथ जैसी बर्फबारी होती रही, जो पहली बार देखने को मिली है। इधर, गुप्तकाशी के देवर गांव सहित कालीमठ, घाटी व मद्महेश्वर घाटी के गांव भी बर्फ के आगोश में समाए हुए हैं। अगस्त्यमुनि ब्लाक की क्यूंजा घाटी सहित धनपुर, रानीगढ़ और बच्छणस्यूं पट्टी के ऊपरी गांवों के साथ ही जखोली ब्लाक के सिलगढ़, लस्या, बांगर, फुटगढ़, बड़मा पट्टी के 50 से अधिक गांव बर्फबारी से प्रभावित हो चुके हैं। उधर, चिरबटिया क्षेत्र के दर्जनभर गांवों में भारी बर्फबारी से जनजीवन व्यापक रूप से प्रभावित हआ है। यहां बिजली के तारों को भारी क्षति पहुंची हैं। आने-जाने के रास्ते भी बंद हो चुके हैं। स्थानीय जितेंद्र नैथानी ने बताया कि बीते एक दशक में इस तरह की बर्फबारी पहली बार हो रही है। लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।