रुद्रप्रयाग।
आगामी 29 अप्रैल से शुरू हो रही केदारनाथ यात्रा में इस बार श्रद्धालु पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद ले सकेंगे। पहाड़ी उत्पादों और पहाड़ी भोजन को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन ने सभी होटलों, ढाबा और रेस्टोरेंट में इसे अनिवार्य कर दिया है। ये व्यंजन यात्रा मार्ग से लेकर केदारनाथ तक सभी होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट में उपलब्ध होंगे। आजीविका के माध्यम से चारधाम यात्रा मार्ग पर पहाड़ी फास्ट फूड सेंटर में पहाड़ी बर्गर सहित दाल की पकोड़ी और अन्य उत्पाद भी उपलब्ध होंगे।
आगामी केदारनाथ यात्रा में यात्रा मार्ग के बाजारों, पड़ाव व केदारनाथ धाम में होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में श्रद्धालुओं को भोजन में चावल की रोटी के साथ ही काले भट्ट की भटवाणी, काली दाल का चैसा, गहथ की दाल व फाणा सहित कफली, भंगजीरे व पुदीना की चटनी, झंगोरे की खीर, मंडुवे की रोटी, प्याज के पत्तों की पकोड़े, दाल की भरवा रोटी, काली दाल की पकोड़ी परोसी जाएगी। प्रशासन ने सभी संबंधित व्यवसायियों के लिए पहाड़ी भोजन की उपलब्धता को अनिवार्य कर दिया गया है। इससे जहां यात्रियों को बेहतर भोजन मिलेगा, वहीं स्थानीय उत्पादों की बिक्री से काश्तकारों की आर्थिकी भी सुधरेगी। दूसरी तरफ एकीकृत आजीविका परियोजना के माध्यम से भी बदरीनाथ व केदारनाथ राजमार्ग पर खांकरा, नौगांव, नरकोटा, रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि, भीरी, क्यूंजा गाड, मैखंडा और नारायकोटी में पहाड़ी फास्ट फूड सेंटर खोले जाएंगे। इन सेंटरों में पहाड़ी बर्गर, रोट-अरसे, अरबी के पत्तों से बनी पैतुड़, छाछ, नमक सहित पपीता, राई, प्याज के परांठों के अलावा अन्य स्थानीय भोज्य पदार्थ भी उपलब्ध होंगे। साथ ही दालें, झंगोरा, मंडुवे का आटा, रिंगाल से बने उत्पाद आदि की बिक्री भी की जाएगी।
कोट
पहाड़ी भोजन व उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए इस बार यात्रा मार्ग से लगे बाजारों, पैदल मार्ग के पड़ावों व केदारनाथ धाम में पहाड़ी भोजन को अनिवार्य कर दिया गया है। सभी संबंधित व्यवसायियों के साथ जल्द इस संबंध में बैठक कर भोजन का मूल्य दर निर्धारित किया जाएगा। - डीआर जोशी, मुख्य विकास अधिकारी रुद्रप्रयाग।