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खुले चेंबर का पानी पीने को मजबूर 20 हजार की आबादी

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जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग की 20 हजार से अधिक आबादी को जलसंस्थान खुले चेंबर से जलापूर्ति कर रहा है। यहां लाखों की लागत से लगा फिल्टर पंप वर्षों से खराब पड़ा है। जिस कारण हल्की बारिश में भी योजना से मटमैला पानी सप्लाई हो रहा है। साथ ही कई बार नलों से कीड़-मकोडे भी निकल रहे हैं।
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रुद्रप्रयाग नगर क्षेत्र के लिए पुनाड़ गदेरा से पेयजल योजना का निर्माण किया गया था, लेकिन प्रतिवर्ष बढ़ती आबादी के बीच जहां यह पेयजल योजना अब नाकाफी साबित हो रही है। एक तरफ जहां योजना का पुनर्गठन नहीं हो पाया है। वहीं, योजना के खुले चेंबर से नगर की 20 हजार आबादी के लिए जलापूर्ति की जा रही है। यहां एक दशक पूर्व लगाया गया फिल्टर खराब है, जिसका खामियाजा लोग भुगत रहे हैं। इस समस्या के चलते हल्की बारिश में भी चेंबर से मटमैला पानी सप्लाई हो रहा है। वहीं, बरसात में नलों से मरे सांप, मेंढक व अन्य कीड़े-मकोड़े निकलना आम बात है। कांग्रेस के महामंत्री शैलेंद्र गोस्वामी, उक्रांद के अशोक चौधरी, स्थानीय निवासी सुनील नौटियाल, सुरेंद्र कप्रवाण, व्यापार संघ अध्यक्ष चंद्रमोहन सेमवाल, उप प्रधान अनूप सेमवाल आदि का कहना है कि शासन, प्रशासन व जलसंस्थान को कई बार अवगत कराने के बाद भी स्थिति नहीं सुधरी है। वहीं, डांगसेरा-चिनग्वाड़ मोटर मार्ग के निर्माण से पेयजल योजना कई बार क्षतिग्रस्त हो चुकी है। उन्होंने शासन से पुनाड़ गदेरा-रुद्रप्रयाग पेयजल योजना के पुनर्गठन के साथ ही उच्च क्षमता का फिल्टर लगाने की मांग की है।
पेयजल योजना के पुनर्गठन सहित 5.12 एमएलडी क्षमता के फिल्टर प्लांट लगाने के लिए जलनिगम द्वारा कार्ययोजना तैयार की जा चुकी है। साथ ही योजना के पुनर्गठन के प्रारंभिक सर्वेक्षण के लिए शासन से 41 लाख रुपये की धनराशि मिल चुकी है। सब कुछ ठीक रहा तो अगले दो वर्षों में नगर क्षेत्र में शुद्ध जलापूर्ति होने लगेगी। संजय सिंह, अधिशासी अभियंता, जलसंस्थान
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