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12 वर्ष बाद भी पूरी नहीं हो सकी तैला-सिलगढ़ पेयजल योजना

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तिलवाड़ा। जखोली ब्लाक की सिलगढ़ पट्टी की 16 ग्राम पंचायतों के 20 से अधिक गांवों के लिए बनाई गई सात करोड़ से अधिक लागत की तैला-सिलगढ़ पेयजल योजना दस वर्ष बाद भी पूरी नहीं हो पाई है। ग्रामीण गदेरों का पानी पीने को मजबूर हैं।
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शासन द्वारा वर्ष 2006-07 में तैला-सिलगढ़ पेयजल योजना स्वीकृत की गई थी। 6 करोड़ 80 लाख से अधिक लागत की योजना से शीशों, पंद्रोला, कुमड़ी, जैली, कांडई, भीमली, चाका, फलाटी, मुसढुंग, टाट, जखनोली, तैला, वाड, धारकोट, मरगांव, पाली आदि गांवों की 15 हजार आबादी को लाभ मिलना था। वर्ष 2010 में जल निगम द्वारा कार्य शुरू किया गया, लेकिन आज तक पेयजल लाइन बिछाने का कार्य पूरा नहीं हो पाया है। स्रोत पर बना चेंबर भी क्षतिग्रस्त पड़ा है। ग्राम प्रधान सुशीला देवी, समा देवी, राकेश सिंह, दरम्यान सिंह, उदय सिंह, बलवीर सिंह, पुष्कर सिंह का कहना है कि स्वीकृत बजट खर्च करने के बाद भी योजना अधूरी पड़ी है। बरसात में ग्रामीण गाड़-गदेरों का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जबकि अक्तूबर के बाद से दूरस्थ प्राकृतिक स्रोतों से पानी जुटा रहे हैं। वे एसडीएम, डीएम, कमिश्नर से लेकर विधायक, सांसद और सीएम को भी समस्या से अवगत करा चुके हैं, लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया है। जलनिगम के अधिशासी अभियंता नवल कुमार ने बताया कि पेयजल लाइन बिछाने व स्टोर टैंक का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। पेयजल वितरण लाइन के लिए ढाई करोड़ का इस्टीमेट शासन को भेजा गया है। धन प्राप्त होने पर प्राथमिकता के तौर पर कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
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