अगस्त्यमुनि। पांच दिन अपने मायके भणज गांव में भक्तों के बीच रहने के उपरांत मां नंदा देवी अपनी ससुराल तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के लिए विदा हो गई। मां नंदा को विदा करते समय ग्रामीणों की आंखें नम हो गई। मंगलवार को मां नंदा व शिवजी की उत्सव मूर्ति व रूप छड़ी तुंगनाथ मंदिर में विराजमान होगी।
सोमवार को सुबह से भणज गांव में मां नंदा के दर्शनों के लिए भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। गांवों से पहुंचे भक्तों ने आराध्य को श्रृंगार सामग्री व कलेवा भेंट किया। इसके उपरांत प्रात: 10 बजे से नंदा देवी कौथिग के अंतिम दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान उत्सव ग्रुप के डॉ. राकेश भट्ट के संचालन में नंदा की कथा नृत्य नाटिका में पात्रों ने नंदा के जन्म से लेकर विवाह तक की घटनाओं का मार्मिक वर्णन किया। जागर व गीतों के जरिए कलाकारों द्वारा नंदा के जीवन को शानदार तरीके से उकेरा गया, जिसे देख मेलार्थी भी भावुक हो गए। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड देवी-देवताओं की भूमि है। यहां मनुष्य और देवताओं के मिलन के लिए इस तरह के आयोजन समाज में विशेष स्थान रखते हैं। कौथिग समिति के संरक्षक व केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने कहा कि आने वाले समय में आयोजन को भव्य रूप से मनाया जाएगा। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि पुलिस अधीक्षक पीएन मीणा, प्रमुख जगमोहन सिंह रौथाण, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चंडी प्रसाद भट्ट ने अपने विचार व्यक्त किए। सभी अतिथियों द्वारा आराध्य नंदा के दर्शन कर पूजा-अर्चना भी की गई। शाम चार बजे मां नंदा की उत्सव मूर्ति का भव्य श्रृंगार किया गया। इसके बाद क्यूंजा घाटी के विभिन्न गांवों के भक्तों द्वारा आराध्य की उत्सव मूर्ति को डोली में विराजमान किया गया, जिसके बाद पूरा क्षेत्र मां नंदा के जयकारों से गूंज उठा। महिलाओं द्वारा गीत व जागरों के साथ अपनी ध्याण मां भगवती नंदा को ससुराल हिमालय तृतीय केदार के लिए विदा किया गया। आयोजन समिति के अध्यक्ष महेंद्र सिंह व उपाध्यक्ष रजपाल भारती ने सात दिवसीय सफल आयोजन में मिले सहयोग के लिए ग्रामीणों व क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।