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वीरान गांव बरसू में बयार लाने में जुटा विजय सेमवाल

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रुद्रप्रयाग। फिर लौटेगी मेरे गांव में बयार, खिल उठेंगे आंगन, चौबारे..खेतों में लहलहाएंगी फसल, घरों में होगा फिर उजियारा... इस उम्मीद को लिए तीन वर्ष से विजय सेमवाल जनशून्य हो चुके बरसू गांव को फिर से गुलजार करने की कोशिश में जुटे हैं। परिवार से दूर, वीरान मकानों और झाड़ियों के बीच साग-भाजी उत्पादन से लेकर गाय, मुर्गी पालन कर वह गांव छोड़ चुके परिवारों से लौटने का आह्वान कर रहे हैं।
जिला मुख्यालय से करीब चार किमी की दूरी पर स्थित बरसू गांव की वीरानगी जल्द दूर होने की उम्मीद जगी है। यहां 40 वर्षीय सेमवाल बीते तीन वर्ष से गांव की बंजर हो चुके खेतों में कृषि लायक बनाकर सब्जी उत्पादन कर रहे हैं। करीब चार नाली भूमि में आलू, मटर, फूलगोभी, मटर, मेथी, धनिया, राई, पालक, प्याज का उत्पादन कर वह अपनी आर्थिकी को मजबूत करने के साथ ही गांव छोड़ चुके परिवारों को भी प्रेरित कर रहे हैं। डेढ़ किमी दूर से प्लास्टिक के पाइपों के जरिए खेतों तक पानी ला रहे हैं। उन्होंने आवारा पशुओं के लिए गोशाला भी बनाई है, जिसमें आठ मवेशी हैं। बंदरों और सुअरों से खेती को बचाने के लिए चार कुत्ते भी पाले हैं।
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विजय के इस प्रयास ने गांव के कुछ ग्रामीण प्रेरित हुए हैं। उन्होंने अपने पैतृक घरों की मरम्मत की है। कुछ समय से वे यहां पहुंच भी रहे हैं। रुद्रप्रयाग निवासी विश्वेश्वर दत्त नौटियाल (86), दिनेश सेमवाल, रामचंद्र नौटियाल, दुर्गा प्रसाद का कहना है कि विजय की मेहनत ने बरसू के फिर से आबाद होने की उम्मीद जगा दी है। गांव की मिट्टी खेती के बहुत बढ़िया है। जनप्रतिनिधियों द्वारा शासन स्तर से अगर प्रयास किए जाएं तो गांव को फिर से गुलजार किया जा सकता है।

राज्य बनने के बाद हुआ जनशून्य
रुद्रप्रयाग। बरसू गांव में 90 के दशक तक बिजली, पानी, सड़क की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण 80 से अधिक परिवारों वाला गांव उत्तराखंड राज्य बनने के दो-तीन वर्षों में खाली होने लगा। स्थिति यह रही कि एक दशक पूर्व यह गांव जनशून्य हो गया था। यहां कई मकान खंडहर हो गए हैं, जबकि कुछ जमींदोज हो चुके हैं। रास्ते से आंगन तक झाड़ियां और घास उगी है।

गांव की तिबारियां आज सुरक्षित
रुद्रप्रयाग। जिला मुख्यालय से लगे बरसू गांव में घरों में बनी वर्षों पुरानी तिबारियां आज भी सुरक्षित हैं। यहां अधिकांश घरों पर लकड़ी का ज्यादा कार्य हुआ है, जिन पर नक्काशी की गई है। यहां जर्जर हो चुके कुछ घरों में देवी-देवताओं के निषाण भी मौजूद हैं।

इनका कहना है --
पलायन से खाली हुए बरसू गांव में विजय सेमवाल द्वारा सब्जी उत्पादन प्रेरित करने वाला है। उम्मीद है कि उनके कार्य को देख अन्य लोग भी इस क्षेत्र में लौटे। मैं स्वयं गांव जाकर सेमवाल के कार्यों को देखने के लिए उत्सुक हूं। - मंगेश घिल्डियाल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग ।
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मैं इसी गांव में जन्मा हूं और पला-बढ़ा। कोशिश कर रहा हूं कि मेरे इस कार्य से गांव के अन्य भाई-बंधु भी लौटें और हमारा बिरसू फिर से गुलजार हो जाए। आने वाले समय में हट्स निर्माण के साथ मत्स्य पालन के बारे में भी सोच रहा हूं।- विजय सेमवाल, निवासी बरसू गांव
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