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पीएम मोदी की दिव्य व भव्य केदारनाथ की कल्पना हो रही साकार

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रुद्रप्रयाग। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिव्य और भव्य केदारनाथ की कल्पना साकार होनी लगी है। तीन चरणों में होने वाले पुनर्निर्माण कार्यों के तहत मंदिर परिसर और मंदिर मार्ग को भव्य रूप मिल चुका है। साथ ही अन्य कार्यों ने भी गति पकड़ ली है।
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16/17 जून 2013 की आपदा से व्यापक रूप से प्रभावित केदारनाथ धाम को मास्टर प्लान के तहत 2021 तक दिव्य और भव्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है। पांच योजनाओं के अंतर्गत तीन चरणों में पुनर्निर्माण कार्य प्रस्तावित हैं। पहले चरण में 250 करोड़ रुपये में मंदिर मार्ग व परिसर का विस्तार, मंदाकिनी व सरस्वती नदी पर घाट व सुरक्षा दीवार का निर्माण कार्य हो रहा है। मंदिर परिसर और मंदिर मार्ग का चौड़ीकरण कर दिया गया है। मंदाकिनी और सरस्वती नदी के संगम पर 15 फीट ऊंचा व करीब 25 फीट चौड़ा चबूतरा बनाया गया है, जहां से बाबा केदार के साक्षात दर्शन हो रहे हैं। मंदिर परिसर से चबूतरे तक 40 हजार कटवा पत्थर बिछाए जाने हैं, जिसमें सात हजार पत्थर बिछ चुके हैं। पीएम मोदी के बीते वर्ष 3 मई और 20 अक्तूबर को केदारनाथ पहुंचने के बाद से पुनर्निर्माण कार्यों को एक नई गति मिली है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उत्तराखंड के मुख्य सचिव उत्पल कुमार पदभार संभालने के बाद पिछले आठ महीनों में नौ बार केदारनाथ पहुंचकर पुनर्निर्माण कार्यों का जायजा ले चुके हैं। केदारनाथ-गौरीकुंड पैदल मार्ग को भी रामबाड़ा तक चौड़ा किया जा रहा है। इसके अलावा पुराने पैदल मार्ग को भी पुनर्जीवित करने के प्रयास हो रहे हैं। जल्द ही इस क्षेत्र का भू-गर्भीय सर्वेक्षण किया जाना है। बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मार्च 2014 में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान को केदारनाथ पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी थी।

दूसरे चरण में होंगे ये कार्य
केदारनाथ पुनर्निर्माण के तहत दूसरे चरण में आदिगुरू शंकराचार्य के समाधिस्थल का पुनर्निर्माण होना है। इसके लिए मंदिर के पीछे जगह का चयन किया जा चुका है। साथ ही पार्क निर्माण और ब्रह्मवाटिका की स्थापना की जानी है। तीसरे चरण में केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहितों के लिए मास्टर प्लान के तहत 70 से अधिक मकानों का निर्माण किया जाना है। इन सब पर लकड़ी की नक्काशी की जानी है। साथ ही मंदिर मार्ग पर डाकघर, बैंक, एटीएम आदि स्थापित किए जाने हैं।
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पड़ावों के संरक्षण को नहीं बन सकी नीति
आपदा के बाद केदारनाथ तक पहुंच के लिए मंदाकिनी नदी के बायीं तरफ लिनचोली, छानी कैंप, रुद्रा प्वाइंट और बेस कैंप नए पड़ाव बसाए गए, लेकिन ठीक नीचे बह रही नदी के तेज बहाव से यहां प्रतिवर्ष भू-कटाव हो रहा है, जिससे इन पड़ावों को खतरा बना हुआ है। बावजूद पांच वर्ष बाद भी संरक्षण की कोई योजना नहीं बन पाई है।

बस यादों में रामबाड़ा
रामबाड़ा को केदारनाथ यात्रा का दिल कहा जाता था। बाबा के दर्शनों को जाने वाले और दर्शन कर लौटने वाले श्रद्धालुओं का यह मिलन केंद्र था। साथ ही केदारघाटी के लोगों के रोजगार का यह महत्वपूर्ण केंद्र था, लेकिन आपदा में तबाह होने के बाद यह यादों में ही रह गया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रधानमंत्री मोदी की रामबाड़ा में स्मृति वन स्थापना की घोषणाएं भी अभी तक फलीभूत नहीं हो पाई हैं।

अब भी हाशिए पर गौरीकुंड
केदारनाथ यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव गौरीकुंड, जो यात्राकाल में 24 घंटे गुलजार रहता था, बीते पांच वर्ष से हाशिए पर है। यात्रा संचालन के नाम पर सिर्फ गिनती के कार्य हुए हैं। नमामि गंगे के तहत प्रस्तावित कार्य यहां शुरू नहीं हो पाए हैं। आपदा में ध्वस्त हुए तप्तकुंड के पुनरोद्धार के प्रयास भी अभी तक धरातल पर नहीं हो पाए हैं।

मुख्य पड़ाव की सुरक्षा भगवान भरोसे
वर्ष 2014 से केदारनाथ यात्रा का संचालन सोनप्रयाग से हो रहा है। यहां पर श्रद्धालुओं का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है, लेकिन इस कस्बे की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आपदा में तबाह हुआ यह कस्बा भले ही अपने मूल स्वरूप में लौट चुका है, लेकिन मंदाकिनी का तेज बहाव अब भी खतरा बना हुआ है।

आज भी पुलों का इंतजार
16/17 जून की आपदा में मंदाकिनी नदी पर माई की मढ़ी, सिल्ली, विजयनगर, रयांसू, चंद्रापुरी, विद्यापीठ, रेल गांव में बने झूला पुल बह गए थे. लेकिन पांच वर्ष में सिर्फ माई की मढ़ी व सिल्ली पुल से आवाजाही शुरू हो पाई है। अन्य पुलों का कार्य कछुआ गति से चल रहा है। लोक निर्माण विभाग कभी धन तो कभी संसाधनों का रोना रो रहा है। क्षेत्रीय गांवों के लोग इन स्थानों पर लगी ट्रालियों से आवाजाही करने को मजबूर हैं। बता दें कि ट्रालियों से गिरकर बीते पांच वर्षों में एक बच्ची सहित तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 40 से अधिक लोग घायल हुए हैं। बावजूद सरकारी तंत्र सुध लेने को तैयार नहीं है। उधर, कालीगंगा में रुच्छ महादेव जाने के लिए पुल नहीं बन पाया है।
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