रुद्रप्रयाग। ‘सर, अगली बार आप केदारनाथ धाम मोटर मार्ग के रास्ते आना.. केदारनाथ तक सड़क जरूरी हो गई है। आपदा के बाद पैदा हुए हालातों में इस मांग की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।’ यह शब्द तीर्थ पुरोहित समाज के लोगों ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह से कहे। इस मौके पर गौरीकुंड-केदारनाथ मार्ग निर्माण और राज्य सरकार द्वारा लागू केदारनाथ विकास प्राधिकरण को वापस लेने की मांग का ज्ञापन भी गृह मंत्री को सौंपा गया।
रविवार को केदारनाथ पहुंचे गृहमंत्री से तीर्थ पुरोहितों ने कहा कि जून 2013 के बाद से राज्य सरकारों का ध्यान धरातल पर जरूरी व्यवस्थाओं को बेहतर करने के बजाय हवाई सेवा को बढ़ावा देने का रहा है। क्षेत्रीय जनता, जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु गौरीकुंड से रामबाड़ा या केदारनाथ तक मोटर मार्ग निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। वर्ष 1975 में गौरीकुंड से रामबाड़ा के लिए आठ किमी सड़क स्वीकृत की गई थी। तब लोक निर्माण विभाग द्वारा दो किमी सड़क का निर्माण भी किया गया, लेकिन बाद में वन अधिनियम का हवाला देकर कार्य बंद कर दिया गया। इसके बाद केदारनाथ को मोटर मार्ग से जोड़ने के लिए समय-समय पर आंदोलन भी हुए, लेकिन आज तक सुध नहीं ली गई।
उन्होंने केदारनाथ के लिए चौमासी-केदारनाथ और त्रियुगीनारायण-केदारनाथ विकल्प पैदल संपर्क मार्गों को मोटर मार्ग में बदलने के लिए सर्वे किए जाने की मांग की। तीर्थ पुरोहितों ने गृहमंत्री से केडीए को वापस लेने की मांग दोहराते हुए कहा कि केदारपुरी में इतनी भूमि नहीं है कि यहां प्राधिकरण का गठन कर उसके हिसाब से निर्माण किया जाए। केडीए को लागू करने के बजाय सरकार केदारनाथ व केदारपुरी की भूमि की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम करे। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सभी मांगों पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। ज्ञापन सौंपने वालों में वयोवृद्ध श्रीनिवास पोस्ती, लक्ष्मी नारायण जुगराण, विनोद शुक्ला, कुबेरनाथ पोस्ती आदि थे।