रुद्रप्रयाग। इस वर्ष बाबा केदार के दर्शनों को केदारनाथ धाम आने वाले श्रद्धालु गुफाओं में योग और ध्यान साधना भी कर सकेंगे। धाम में मंदिर से 100 मीटर बायीं तरफ मंदाकिनी नदी किनारे एक गुफा मिली है, जिसे कपाट खुलने तक बेहतर तरीके से तैयार किया जाएगा। इसके साथ केदारपुरी और गरुड़चट्टी क्षेत्र की पहाड़ियों में भी गुफाएं विकसित की जाएंगी। मंगलवार को केदारनाथ पहुंचे मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने यह बात कही।
मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन व कार्यदायी संस्थाओं से कहा कि धाम में आने वाले श्रद्धालु और साधु-संत एकांत में योग व ध्यान साधना कर सकें, इसके लिए गुफाएं तैयार की जाए। निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव व अन्य अधिकारियों को मंदिर से करीब 100 मीटर बायीं तरफ मंदाकिनी नदी किनारे एक गुफा मिली है। मुख्य सचिव ने यात्रा से पूर्व इस गुफा में शौचालय, पानी और प्रकाश की व्यवस्था का जिम्मा जिंदल ग्रुप को सौंपा है। उन्होंने केदारनाथ मंदिर व केदारपुरी में वृहद स्तर पर साफ-सफाई अभियान चलाकर धाम परिसर को सुसज्जित बनाने के निर्देश दिए। कहा कि पुनर्निर्माण कार्य से किसी भी यात्री को कोई दिक्कत न हो, इसका कार्यदायी संस्थाएं विशेष ध्यान रखें। निर्माण सामग्री व अन्य वस्तुओं को ऐसे स्थान में रखें, जिससे यात्रा किसी भी प्रकार से प्रभावित न हो।
मुख्य सचिव ने कहा कि आगामी यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के साथ ही धाम में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है। सभी व्यवस्थाएं यात्रा शुरू होने से पहले हर हाल में पूरी की जाएं। उन्होंने एएसआई को मंदिर के सामने चबूतरे पर पत्थर लगाने और निम को मंदिर के पीछे सौंदर्यीकरण कार्य जल्द पूरा करने के साथ ही सरस्वती नदी के घाट का कार्य पुन: शुरू करने के निर्देश दिए। ऊर्जा निगम के अधिकारियों से कहा गया है कि मंदिर के समीप लगे पोल तत्काल हटा लिए जाएं। इस दौरान गढ़वाल कमिश्नर दिलीप जावलकर, जीएमवीएन की एमडी ज्योति खैरवाल, डीएम मंगेश घिल्डियाल, एसडीएम गोपाल सिंह चौहान सहित कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारी मौजूद थे।
पैदल मार्ग के दोनों तरफ बनेंगी सुरक्षा दीवार
रुद्रप्रयाग। मुख्य सचिव ने केदारनाथ मंदिर गेट से सर्किल प्वाइंट तक बन रहे पैदल मार्ग के दोनों तरफ सुरक्षा दीवार बनाने को कहा, साथ ही बीकेटीसी को आदेश दिए किए वे मंदिर से घाट तक पैदल मार्ग व चबूतरों के साथ भवनों को आकर्षित व प्रकाशमान करें। उन्होंने प्रशासन से कहा कि तीर्थ पुरोहित दिनेश पोस्ती व हरीश पोस्ती के भवनों को निकास नाली के लिए जरूरत पड़ने पर तोड़ा जाए। साथ ही तीन अन्य भवनों की ऊपरी छत हटाकर शेष कमरों की मरम्मत कर दी जाए।