अगस्त्यमुनि। टिहरी के स्थापना दिवस पर आयोजित गोष्ठी में निर्माणाधीन व स्वीकृत बड़ी जल विद्युत व अन्य परियोजनाओं से हो रहे विस्थापन और उससे पड़ रहे प्रभाव पर चर्चा की गई। इस मौके पर वक्ताओं ने गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की पुरजोर पैरवी भी की।
सामाजिक संस्था प्रकृति की ओर से आयोजित गोष्ठी में पहाड़ से हो रहे पलायन पर चिंता जताते हुए वक्ताओं ने कहा कि पंचेश्वर बांध, ऑल वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन, सिंगोली-भटवाड़ी सहित अन्य जल विद्युत परियोजनाओं का बढ़ता क्षेत्र स्थानीय परिवेश के लिए घातक सिद्ध हो रहा है। भूकंप की दृष्टि से जोन-5 में शामिल इस पर्वतीय क्षेत्र में हो रहे निर्माण कार्यो में कार्यदायी संस्थाओं का भारी विस्फोटकों का प्रयोग करने से पहाड़ हिल रहे हैं और हल्की बरसात में भूस्खलन का कारण बन रहे हैं। कहा कि सबसे बड़ा बांध होने के बाद भी टिहरी बांध से पहाड़ के लोगों को आज तक बिजली, पानी और स्थायी रोजगार नहीं मिल पाया है। वक्ताओं ने कहा कि ऑल वेदर रोड से प्रभावित हो रहे गांवों व परिवारों को पहाड़ में ही छोटे-छोटे कस्बे विकसित कर पुनर्वास कर रोजगार दिया जाना चाहिए। गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने पर जोर देेते हुए कहा गया कि पहाड़ में मूलभूत सुविधाएं मिलेंगी और लोगों को रोजगार भी मिलेगा। इस मौके पर मदन मोहन चमोली, गंगा राम सकलानी, सुधीर बर्त्वाल, कुसुम भट्ट, गिरीश बेंजवाल सहित कई संगठनों से जुड़े लोग मौजूद थे।