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गांवों को स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित कर रोजगार बढ़ाए : मिश्रा

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गुप्तकाशी। केदारघाटी के देवर गांव को स्मार्ट विलेज की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। यहां मूलभूत सुविधाएं जुटाने के साथ ही रोजगार के अवसर भी मुहैया कराए जाएंगे, ताकि युवाओं को नौकरी के लिए बाहर नहीं जाना पड़े। इस बारे में डीएम ने विभागों को कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।
यहां आयोजित 14वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में गोविंद बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति व पशु चिकित्सा के वैज्ञानिक डा. एके मिश्रा ने कहा कि पलायन ने पहाड़ को वीरान कर दिया है। इसलिए गांवों को स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित करने की जरूरत है, जिससे वहां के लोगों को जरूरी सुविधाएं मिल सके। उन्होंने गांवों के कृषकों को खेती पशुपालन के बारे में समय-समय पर प्रशिक्षण पर जोर देते हुए कहा कि जब ग्रामीणों को नई-नई तकनीक व सुविधाएं उपलब्ध होंगी तो वे पलायन नहीं करेंगे। देवर गांव का जिक्र करते हुए कहा कि यहां प्रकृति ने अपनी नेमतें बख्शी हैं। चौखंभा सहित संपूर्ण हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं के साक्षात दर्शन हो रहे हैं। ऐसे में पर्यटन, ईको टूरिज्म सहित कृषि व पशुपालन के माध्यम से लोगों को स्वरोजगार से जोड़ा जाए।
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जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने गांव के विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, सड़क, बैंक, दुग्ध विकास, पेयजल, स्वजल सहित अन्य विभागों को कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि जनप्रतिनिधियों व विभागीय अधिकारी आपसी तालमेल के साथ ग्रामीणों को जरूरी सुविधाएं मुहैया कराएं। बैठक में ग्राम प्रधान विक्रम लाल ने गांव के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने स्मार्ट विलेज के तहत गांव के 100 काश्तकारों को हल व 100 पशुपालकों को अच्छी नस्ल की दुधारू गाय देने की मांग की। इस मौके पर कृषि विवि पंतनगर के शोध निदेशक डा. एसएन तिवारी, प्रसार निदेशक डा. वाईपीएस डबास, कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डा. एके अग्रवाल, डा. वीवी सिंह, डा. नीलकंठ, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डा. आरसी नितवाल, यूके सक्सेना, डीएसओ जेएल मखनवाल सहित अन्य ग्रामीण मौजूद थे।
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