रुद्रप्रयाग। जखोली ब्लाक के लस्या, बड़मा सिलगढ़ पट्टी के 50 से अधिक गांवों की सिंचित भूमि के लिए वर्ष 1970 में निर्मित 30 किमी लंबी लस्तर नहर पर पानी नहीं चलने से काश्तकारों की खेती सूख रही है।
बरसात से नहर कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसकी सिंचाई विभाग ले मरम्मत कर दी है। बावजूद इसके नहर पर पानी का संचालन शुरू नहीं होने से पौंठी, सन, धारकुड़ी, जखवाड़ी, लिस्वाल्टा, खलियाण, मुनियाघर, चौंरा, नंदवाणगांव, कुनियाली, बचवाड़, सिराई, कपणिया, बरसीर, जैंती, कोठियाड़ा, चंदी, जखोली, ललूड़ी, बमणगांव, देवल, खरियाल, बजीरा आदि गांवों की सैकड़ों नाली भूमि को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता रामरतन पंवार ने बताया कि सितंबर माह में गेहूं की बुआई हो चुकी है। नहर से पानी सप्लाई नहीं होने से खेतों में फसल सूख रही है। सर्दियां बढ़ने से रात को पाला गिरने खेती ज्यादा प्रभावित हो रही है। विभाग को कई बार अवगत कराने के बाद भी नहर से पानी का संचालन नहीं किया जा रहा है। बीडीसी व तहसील दिवस में मामला कई बार उठाया जा चुका है। बावजूद विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा है। इधर, बड़मा संघर्ष समिति के अध्यक्ष कालीचरण रावत ने कहना है कि लस्तर नहर सिंचाई विभाग के लिए दुधारु गाय बनी हुई है। प्रतिवर्ष मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। काश्तकारों को इसका पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा है। इधर, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता त्रिलोक सिंह गुसाईं ने बताया कि बरसात से नहर कई स्थानों पर टूटी है, जिसकी मरम्मत कर दी गई है। जमा गाद को भी साफ कर दिया गया है। नहर का बहाव 60 क्यूसेक का है। ऐसे में सीमित पानी ही छोड़ा जा रहा है। पानी की जरूरत के लिए काश्तकार अवगत करा दें, जिससे पर्याप्त पानी नहर पर छोड़ दिया जाएगा।