केदारनाथ। ‘देवभूमि उत्तराखंड का सभी भाई-बैणों तै मेरो नमस्कार, बाबा केदार को आशीर्वाद सभी पर बणू रै, यनी कामना छ...’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन की शुरूआत बाबा केदार के जयकारे के साथ इस प्रकार गढ़वाली भाषा में की तो, केदार धाम में मौजूद जन समूह भगवान भोले और मोदी के जयकारों से गूंज उठा।
शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी ने जैसे ही गढ़वाली में संबोधन शुरू किया, केदारनाथ धाम में मौजूद जनसमूह बाबा केदार और हर-हर मोदी के जयकारों से गूंज उठा। प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड फौजियों के गांवों का राज्य है। यहां के हर गांव के अधिकांश परिवारों में एक-एक फौजी है, जो देश की रक्षा में तैनात है। सेवानिवृत्त फौजियों की संख्या भी काफी है, जो क्षेत्र के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में अपना अहम योगदान दे रहे हैं। सेना का जवान अनुशासनप्रिय होता है। प्रदेश सरकार इन भूतपूर्व सैनिकों से चारधाम यात्रा के संचालन में सहयोग ले सकती है, ताकि यात्रियों में अनुशासन का संदेश जाए। केदारनाथ धाम सहित बदरी विशाल और अन्य तीर्थ स्थलों की पवित्रता और स्वच्छता को बनाए रखने के लिए जनजागरूकता जरूरी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य देश का आदर्श राज्य बन सकता है, इसके लिए एकजुट होकर कार्य करने की जरूरत है।
प्रोटोकाल दरकिनार मिले आम जन से
केदारनाथ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल को दरकिनार कर एक बार फिर केदारनाथ धाम में जनता के बीच में जाकर उनसे भेंट की। भाषण समाप्त करने के बाद मोदी मंदिर परिसर की सीढ़ियों से नीचे उतरे और मंदिर के पैदल मार्ग पर करीब 100 मीटर पैदल चले। इस दौरान बैरीकेडिंग के दोनों तरफ मौजूद जनसमूह का उन्होंने कभी दोनों हाथ जोड़कर तो कभी हाथ हिलाकर अभिनंदन किया। कई लोगों से हाथ मिलाकर उनका हाल पूछा। मोदी करीब 5 मिनट तक जनता से मिले।