रुद्रप्रयाग। डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी केदारनाथ धाम में नमामि गंगे के कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। बीते वर्ष केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने अधिकारियों के साथ धाम में होने वाले कार्यों का निरीक्षण किया था और कार्य जल्द पूरा करने की बात कही थी। आज तक यहां योजना के कार्य शुरू नहीं हुए।
वर्ष 2016 के जुलाई माह में नमामि गंगा योजना के तहत रुद्रप्रयाग जिले में दो स्थानों पर कार्यों का शिलान्यास किया गया था, लेकिन डेढ़ वर्ष बाद भी यहां काम शुरू नहीं हुए। रुद्रप्रयाग में मंदाकिनी व अलकनंदा नदी किनारे बन रहे घाटों का निर्माण छह माह से बंद पड़ा है। वहीं, गौरीकुंड के लिए आज तक योजना नहीं बन पाई है। केदारनाथ धाम में न तो आपदा में दबे कुंडों का पुनर्निर्माण हुआ और न घाटों का निर्माण कार्य शुरू हुआ। बीते वर्ष 1 नवंबर को बाबा केदार के कपाट बंद होने के बाद केंद्रीय मंत्री उमा भारती धाम में ही रुक गई थी। तब, उन्होंने योजना के कार्यों के शुरू नहीं होने पर प्रशासन और अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई थी। तब, केंद्रीय मंत्री ने कहा था कि छह माह में हंस, रेतस सहित मलबे में दबे अन्य कुंडों को उनके वास्तविक स्वरूप में लाया जाएगा। केदारपुरी में मलबा सफाई सहित अत्याधुनिक सुविधाजन घाट निर्माण सहित अन्य कार्य भी किए जाएंगे, लेकिन आज भी स्थिति जस की तस है। वयोवृद्ध तीर्थ पुरोहित श्रीनिवास पोस्ती, केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला, महामंत्री कुबेरनाथ पोस्ती, लक्ष्मीनारायण जुगराण, व्यापार संघ अध्यक्ष महेश प्रसाद बगवाड़ी का कहना है कि प्राचीन कुंडों के पुनर्निर्माण को लेकर राज्य व केंद्र कोई कार्य नहीं कर रही है। अभी तक सिर्फ कोरी घोषणाएं हुई हैं।
कोट
केदारनाथ व गौरीकुंड के प्राचीन कुंडों के भू-गर्भीय सर्वेक्षण के लिए वाडिया संस्थान को कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं। शासन को भी अवगत कराने पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। - बीडी सिंह, मुख्य कार्याधिकारी श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति।