रुद्रप्रयाग। शनिवार को आराध्य और ध्याण के अटूट बंधन देखने को मिला। जब लाठी के सहारे छह किमी पैदल सफर तय कर 80 वर्षीय जूपा देवी अपने मैती देवी के मंदिर पहुंची। वे, सुबह 9 बजे अपने मायके वालों के साथ देवी दर्शनों के लिए निकल गई थी। दोपहर 1.30 बजे मंदिर पहुंची। मैती देवी के दर्शन पाकर वह बोलीं, उम्र के इस पड़ाव में वर्षों बाद मैती देवी के दर्शन पाकर वे धन्य हो गई। मां भगवती से घर, परिवार के साथ मैतियों की सुख-समृद्धि की मनौती मांगते हुए वृद्धा ध्याण की आंखें भी डबडबा गई।
गोपेश्वर से पहुंची सुरेशी देवी ने बताया कि मां हरियाली की जात के बहाने मैतियों की नई पीढ़ी से भी भेंट हो रही है। इधर, नई ध्याण संतोषी, ज्वाल्पा, किरन व ममता आदि ने बताया कि जात में देवी के दर्शन और अपनों से मिलकर अच्छा लग रहा है। आराध्य की इस जात में पड़ोसी गांवों की ध्याणियों का मिलन भी हो रहा है, जो माहौल को सुखद बना रहा है।
12 वर्ष बाद आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में नवासू, खिंगासारी, डांडरा, सारगड्डी, मोल्ठा, सिली व तैली बंगोली, पणधारा, कलेथ, निषणी आदि गांवों के ग्रामीणों के साथ ध्याणियां भी दर्शनों को पहुंच रहीं हैं। इधर, जात के पांचवे दिन देव नृत्य देखने भक्तों की भीड़ जुटी रही।
56 ध्याणियां हुई सम्मानित
हरियाली जात के पांचवें दिन आयोजन समिति की ओर से 80 वर्षीय वृद्धा ध्याण सहित नई व पुरानी 56 ध्याणियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इस मौके पर कई ध्याण अपने ताऊ, चाचा, दादा के गले लगकर फफक-फफकर रो पड़ी। समिति के संरक्षक देवी प्रसाद बहुगुणा व प्रेम सिंह रौथाण ने बताया कि 26 व 27 दिसंबर को ध्याणियों को विशेष भोज भी दिया जाएगा।