रुद्रप्रयाग। बरसात से अभी तक जनपद में 67 पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिससे तीनों ब्लाकों के कई कस्बे, गांव व तोक पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। ग्रामीण दूरस्थ बरसाती स्रोतों से अपनी प्यास बुझा रहे हैं। जलसंस्थान ने योजनाओं की मरम्मत के लिए 2 करोड़ रुपये की मांग की है।
बरसात से पुनाड़ गदेरा-रुद्रप्रयाग नगर पेयजल योजना स्रोत से ही क्षतिग्रस्त हो रखी है। भले ही विभाग की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था से नगर के लिए पेयजल सप्लाई की जा रही है, लेकिन आए दिन सप्लाई बाधित हो रही है। वहीं, अगस्त्यमुनि नगर की पेयजल योजना भी बीते जून माह से कई जगहों पर बाधित है। यहां प्लास्टिक के पाइप के सहारे पानी सप्लाई हो रहा है। जबकि अगस्त्यमुनि ब्लाक में 44, ऊखीमठ में 15 और जखोली ब्लाक में 8 योजनाएं क्षतिग्रस्त हैं, जिसमें मिभली-शिशों, मयाली, रूमसी, कोठगी, सारी, ऊखीमठ व गुप्तकाशी, कुणजेठी, नाला, उत्यासू, चिलौंड-चौमासी, सारी, ह्यूण, मक्कू, छिनका कुमेड़ा तोक, ढुंग, जग्गी-कांडई, बज्यूण, गैठाणा, जगोठ-क्यार्की, सिल्ला बामण गांव गदनू तोक, कमेड़ा-उरखोली, एससी बस्ती तड़ाग, एससी बस्ती कोट तल्ला, बंगोली-ढामणी, रतूड़ा, सुमाड़ी, मणिगुह, ग्वाड़, बछनी, पपडासू, पिल्लू, हैड़ाधार-भटवाड़ी, लमेरी, तिलणी, पोखरी-धारतोली, स्यूंड-ढामक, भैंसारी, बणसू आदि शामिल हैं। योजनाओं के क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीण डेढ़ से दो किमी दूर बरसाती स्रोतों से अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं। वन पंचायत सरपंच देवी प्रसाद थपलियाल, सामाजिक कार्यकर्ता बिंदी लाल, मुलायम सिंह तिंदोरी, जिला पंचायत सदस्य योगंबर सिंह नेगी आदि ने बताया कि विभाग को अवगत कराने पर भी स्थिति पूर्ववत है।
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क्षतिग्रस्त योजनाओं में कुछ की प्लास्टिक पाइप की मदद से अस्थायी मरम्मत कर पानी सप्लाई की जा रही है, लेकिन इन योजनाओं की स्थायी मरम्मत के लिए 2 करोड़ रुपये की जरूरत है। प्रशासन के माध्यम से शासन को प्रस्ताव भेजा जा रहा है।
संजय सिंह, अधिशासी अभियंता, जलसंस्थान