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बुरूवा गांव की पेयजल योजना फाइलों में धूल फांक रही

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रुद्रप्रयाग। सेंचुरी एरिया में बसे ग्राम पंचायत बुरूवा की पेयजल योजना को पांच वर्ष बाद भी स्वीकृति नहीं मिल पाई है। ग्रामीण प्राकृतिक स्रोत से अपनी जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। बारिश के अभाव में स्रोत का पानी कम हो रहा है, जिससे पेयजल संकट का खतरा मंडराने लगा है।
ऊखीमठ तहसील के ग्राम पंचायत बुरूवा में 150 परिवार रहते हैं। गांव में कोई सरकारी पेयजल योजना नहीं हैं। यहां के लोग पुराने प्राकृतिक स्रोत से पानी जुटा रहे हैं, लेकिन मौसम के चलते स्रोत पर पानी कम हो रहा है, जिससे एक बर्तन भरने में कम से कम आधा घंटा लग रहा है। अगर, जल्द बारिश नहीं हुई तो गर्मी से स्रोत सूख सकता है। ग्राम प्रधान नरोत्तम सिंह धिरवाण ने बताया कि गांव के लिए वर्ष 2013 में पेयजल योजना का प्रस्ताव विभाग को भेजा गया था, लेकिन प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं दी गई। सेंचुरी एरिया का पेंच बताकर अधिकारी पल्ला झाड़ रहे हैं। उन्होंने कहा यदि जल्द योजना को स्वीकृति नहीं दी गई तो जनांदोलन के साथ तहसील और जिला प्रशासन कार्यालय में धरना दिया जाएगा।
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कोट
ग्राम पंचायत बुरूवा की पेयजल योजना वर्ष 2015-16 के प्रस्ताव में शामिल किया गया है। लेकिन सेंचुरी एरिया होने के नोडल स्तर पर आपत्ति लगी है। अब, सेंचुरी क्षेत्र के प्रपत्र तैयार किए जा रहे हैं, इसके बाद पुन: फाइल नोडल कार्यालय को भेज दी जाएगी। - प्रवीन शाह, सहायक अभियंता जलनिगम रुद्रप्रयाग।
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