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मंदाकिनी, अलकनंदा नदी किनारे रेत में बनाए गए नमामि गंगे के घाट!

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रुद्रप्रयाग। अलकनंदा व मंदाकिनी नदी पर नमामि गंगे परियोजना के तहत करोड़ों की लागत से बने घाट बिना बुनियाद खोदे ही रेत के टीले में बनाए गए हैं। मुख्य विकास अधिकारी ने स्वयं यह बात कही है। उन्होंने घाटों के निर्माण कार्य का निरीक्षण और निर्माण में वित्तीय अनियमितता पाते हुए रिपोर्ट जिलाधिकारी और विजिलेंस को भेज दी है।
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केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे परियोजना के तहत स्वीकृत कार्यों पर कार्यदायी संस्था वेपकोस व अन्य विभागों की ओर से पलीता लगाया जा रहा है। रुद्रप्रयाग में करोड़ों की लागत से बनाए गए घाट रेत के टीले में खड़े किए गए हैं। जितनी राशि इनके निर्माण पर खर्च होनी थी, वह भी कार्यदायी संस्थाओं की ओर से खर्च नहीं की गई है। केंद्र सरकार की ओर से जिले में घाटों के निर्माण के लिए 1639.12 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे, जिसमें मंदाकिनी स्नान घाट के लिए 250.23 लाख, मंदाकिनी घाट के लिए 158.92 लाख, रुद्रप्रयाग घाट के लिए 173.90 लाख, रुद्रप्रयाग घाट-2 के लिए 154.67 लाख, अलकनंदा घाट-1 के लिए 234.60 लाख व घाट-2 घाट के लिए 189.81 लाख, कोटेश्वर घाट के लिए 186.6 लाख और घोलतीर घाट के लिए 290.6 लाख निर्धारित बजट रखा गया। इन घाटों का निर्माण वेपकोस कंपनी और सिंचाई विभाग की ओर से किया जा रहा है। कार्यदायी संस्थाओं की ओर से कुछ का कार्य पूरा तो कुछ का 80 प्रतिशत तक पूरा होना बताया गया है, लेकिन एक भी घाट पर बजट पूरा खर्च नहीं किया गया है। मुख्य विकास अधिकारी एनएस रावत ने सभी घाटों का निरीक्षण कर पाया कि निर्माण में धांधली बरती गई है। घाटों के निर्माण में मानकों का ख्याल नहीं रखा गया है। नदी किनारे बिना खुदाई के बुनियाद डाली गई है। यहां तक कि बरसात के दिनों में भी कार्य किया गया जो नियम विरुद्ध है। सीडीओ ने जांच रिपोर्ट डीएम मंगेश घिल्डियाल और विजिलेंस को भेज दी है। सीडीओ ने बताया कि घाटों के निर्माण में कार्यदायी संस्थाओं की ओर से हर मामले में लापरवाही बरती गई है।
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