रुद्रप्रयाग। ‘बेडू पाको बारामासा, काफल पाको चैत’। पहाड़ के इस लोकगीत के आलोक में देखें तो काफल चैत (अप्रैल) महीने में पककर तैयार होता है। बावजूद इसके ग्लोबल वार्मिंग का असर ही है कि समुद्र तल से करीब आठ से नौ हजार फीट ऊंचाई पर पाया जाने वाला काफल का फल तय समय से पहले ही पक कर तैयार हो गया है। यही नहीं इन दिनों भी बुरांश के फूल भी जंगल में खिले हुए दिख सकते हैं।
पट्टी बच्छणस्यूं के नवासू गांव के जंगलों में इन दिनों काफल पक कर तैयार देखे जा सकते हैं। वहीं, कई बुरांश के पेड़ों पर भी फूल खिल चुके हैं। अपने मूल समय से करीब तीन माह पहले खिले इन वन्य फल व फूल को लेकर विशेषज्ञ भी हैरान हैं।
हरियाली मंदिर से लगे जंगल में बांज के बाद बुरांश और काफल के सबसे अधिक पेड़ हैं। इन दिनों यहां अधिकांश काफल के पेड़ों पर फल लगे हुए हैं। मुख्य रास्ते के किनारे के छोटे-छोटे पेड़ भी फल से लकदक हैं। ग्रामीणों की मानें तो काफल के पेड़ों पर फल तय समय से करीब तीन महीने पहले की लग चुके हैं। जबकि बीते वर्षों में काफल का फल मार्च आखिरी सप्ताह में गिनती के पेड़ों पर दिखाई देते थे। जबकि मई मध्य तक ही पूरे जंगल में काफल के पेड़ों पर फल पूरे यौवन पर रहता था।
यहां, बुरांश के कुछ पेड़ों पर फूल खिल रहे हैं। हालांकि इनकी मात्रा अभी काफी कम हैं, जबकि बुरांश के फूल के खिलने का समय चैत माह (15 मार्च के बाद) से शुरू होता है। दौलत सिंह रौथाण, सुमेर सिंह रौथाण, पपेंद्र सिंह रौथाण आदि बताते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार देखा है, जब दिसंबर के तीसरे व चौथे सप्ताह में काफल व बुरांश के पेड़ों पर फल व फूल लगे हैं।
इनका कहना है
कुछ समय से बारिश, बर्फबारी के चक्र में परिवर्तन से ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान में वृद्धि हो रही है। ऐसे में यहां उगने वाली वनस्पतियों सहित फूल समय से पहले खिलकर जल्द नष्ट भी हो रहे हैं। बुरांश और काफल के पेड़ों पर तीन माह पहले ही फल व फूलों का आना पर्यावरण की दृष्टि से शुभ नहीं है।
- जगत सिंह जंगली, पर्यावरणविद्, रुद्रप्रयाग
समय से पहले काफल, बुरांश, फ्यूंली, पैंया आदि फल- फूलों और वनस्पतियों के खिलने की वजह ग्लोबल वार्मिंग है। मौसम के चक्र में हो रहे बदलाव से तो तुंगनाथ क्षेत्र में तो कई वनस्पतियां लुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं।
- डा. बीएस मिंगवाल, वरिष्ठ वैज्ञानिक हैप्रेक, केविवि श्रीनगर गढ़वाल
बुरांश और काफल के फूल और फल खिलने व लगने का मूल समय मार्च मध्य से शुरू होता है। तीन माह पहले ही इन पेड़ों पर फूल व फल का लगना आश्चर्यजनक है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान वृद्धि से यह हो रहा है।
- जीएल मखनवाल, जिला उद्यान अधिकारी, रुद्रप्रयाग