कलियर में कांवड़ पटरी पर मेहवड़ और कलियर के बीच शिविर में सेवा कर रहे एक युवक का संदिग्ध परिस्थितियों में धारदार हथियार से गला काट दिया गया। पुलिस ने उसे सिविल अस्पताल में भरती कराया। फिलहाल पीड़ित बोल पाने में असमर्थ है। पुलिस के अनुसार उसके बयान के बाद ही सही स्थिति का पता लग पाएगा।
जानकारी के अनुसार बुधवार की सुबह करीब नौ बजे कांवड़ पटरी पर मेहवड़ और कलियर के बीच कांवडिय़ों का रेला चल रहा था। कांवड़ पटरी से करीब 500 मीटर अंदर बाग में कांवड़ सेवा शिविर लगाया गया था जहां दौलतपुर निवासी प्रवीन गिरि पुत्र चंद्रपाल गिरि भी खड़ा था।
इसी दौरान किसी ने उसके गले पर धारदार हथियार से वार कर दिया। लहूलुहान होने पर वह जान बचाकर बाइक से भागा और कांवड़ पटरी पर खड़े पुलिस कर्मियों के पास पहुंच गया। सूचना पर थाना प्रभारी कलियर सहित अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। आनन-फानन में पुलिस की गाड़ी से ही उसे सिविल अस्पताल रुड़की लाया गया जहां लगभग तीन घंटे के आपरेशन के बाद उसे हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया। प्रवीन को किसने और क्यों चाकू मारा। इस संबंध में फिलहाल कोई कुछ कहने को तैयार नहीं है। उसके पिता चंद्रपाल गिरि का कहना है कि बेटे की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। सूत्रों के अनुसार प्रवीन आरोपी को पहचानता है और उसने इशारों में बताने की भी कोशिश की, लेकिन आवाज नहीं निकल पाने के कारण पुलिसकर्मी और अन्य उसकी बात समझ नहीं सके।
क्या कहते हैं एसओ कलियर
घटनास्थल पर पूजा की सामग्री बरामद की गई है। मौके पर रोड़ी, कलेवा, सिंदूर, काली दाल आदि बरामद की गई है। यहीं पर जख्मी प्रवीन की चप्पल भी पड़ी थी, जो भी घटना हुई है वह यहीं की है। जल्द ही घटना का खुलासा कर दिया जाएगा।
-रमेश तनवार, एसओ कलियर
युवक को मौत के मुंह से खींच लाए डाक्टर
बुधवार को सिविल अस्पताल रुड़की के चिकित्सकों ने तीन घंटे तक चले आपरेशन के बाद युवक की काफी गहरे तक कट गई गर्दन को जोड़कर उसे मौत के मुंह से बचा लिया। चिकित्सकों के अनुसार पहली बार सिविल अस्पताल में इस तरह का आपरेशन किया गया। उपचार के बाद युवक को खतरे से बाहर बताया जा रहा है, हालांकि उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है।
चिकित्सकों के अनुसार मेहवड़ और कलियर के बीच संदिग्ध परिस्थितियों में गला कटने से सिविल अस्पताल पहुंचा युवक अपनी अंतिम सांसें गिन रहा था। उसके शरीर में 60 प्रतिशत ही आक्सीजन जा रही थी जबकि 95 प्रतिशत से कम आक्सीजन पर व्यक्ति के जीवन को खतरा हो जाता है। आनन फानन में चिकित्सकों ने उसके आपरेशन का निर्णय लिया जबकि आमतौर पर गंभीर हालत में पहुंचे मरीजों को तत्काल हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है, लेकिन चिकित्सकों ने मौके की नजाकत को समझते हुए सूझबूझ का परिचय दिया। लगभग तीन घंटे तक चले आपरेशन के बाद युवक को मौत के मुंह से बाहर खींच लिया गया। गर्दन में नली डालकर कटे हुए हिस्से को जोड़ दिया गया। हालांकि आपरेशन के बावजूद वह बोलने में खुद को असमर्थ पा रहा था। चिकित्सकों के अनुसार आपरेशन के बाद वह खतरे से बाहर है। हालांकि आईसीयू की आवश्यकता को देखते उसे हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया है। मालूम हो कि आमतौर पर राजकीय सिविल अस्पताल में अक्सर मरीज को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है, लेकिन बुधवार को चिकित्सकों की सक्रियता से एक जान बच गई।
क्या कहते हैं सर्जन
गले की नस कटने के बाद उसका आपरेशन करने वाले सिविल अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डा. जेपी नैयर का कहना है कि अगर आधे घंटे की भी देरी हुई होती तो मरीज की जान नहीं बचाई जा सकती थी। कारण कि उसके शरीर में 60 प्रतिशत से भी कम आक्सीजन बची थी और उसके गले की नस कट चुकी थी। लगभग तीन घंटे तक आपरेशन के बाद उसे जोड़ा गया है जिसके बाद वह खतरे से बाहर है।
क्या कहते हैं सीएमएस
सिविल अस्पताल में पहली बार इस तरह का आपरेशन किया गया है जिसमें युवक के सांस की नली कट गई थी। उसके गले में नई ट्यूब डाली गई है। आपरेशन के बाद वह खतरे से बाहर है, उसकी जान बच गई है। फिलहाल उसे आईसीयू में रखने की आवश्यकता थी, इसलिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है।
-डा. संजय कंसल, एनेस्थेटिस्ट और कार्यवाहक सीएमएस