नवरात्र के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की । इस दौरान मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी लाइनें लगी रही। शहर से देहात तक हर्ष और उल्लास के साथ व्रत एवं पूजा अर्चना पूर्ण की गई। बृहस्पतिवार को देवी मां के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा के स्वरूप की पूजा अर्चना होगी।
नवरात्र के दूसरे दिन भी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। सुबह ब्रह्ममुहूर्त में देवी मां का स्नान एवं श्रृंगार आदि कराया गया। इसके बाद देवी मां की भव्य आरती का आयोजन हुआ। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर हवन आदि का भी आयोजन किया गया। नेहरू स्टेडियम के समीप श्री दुर्गा मंदिर में सुबह और शाम के समय श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी। मंदिर के प्रधान पुजारी ज्योतिषाचार्य पंडित जगदीश पैन्यूली ने बताया कि दुर्गा मंदिर में श्रद्धालुओं की अटूट आस्था है। नवरात्र पूजा के लिए शहर ही नहीं बल्कि अन्य दूर दराज के शहर और गांवों के लोग भी पहुंचकर मत्था टेक रहे हैं। उन्होंने बताया कि नवरात्र में देवी मां की जितनी भी भक्ति कर ली जाए, वह कम है। क्योंकि इन दिनों की जाने वाली पूजा का फल अतिशीघ्र मिलता है। पूजा से सभी प्रकार की मनोकामनाओं की सिद्धि होती है।
नवरात्र में कन्याओं के पूजन से मिलता है विशेष फल
रुड़की।
नवरात्र में कुमारी कन्याओं का पूजन करने का विशेष महत्व है। साधारण रूप से नवरात्र के पूर्ण होने पर दस वर्ष तक की कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन कराया जाता है। लेकिन धार्मिक मान्यता यह भी है कि नवरात्र में प्रतिदिन एक कुमारी कन्या का पूजन भी किया जा सकता है। ज्योतिषाचार्य पंडित रमेश सेमवाल ने बताया कि शास्त्रों में कुमारी कन्या वह कही गई है कि जो दो वर्ष की हो चुकी हो। जबकि तीन वर्ष की कन्या को त्रिमुर्ति, चार वर्ष की कन्या को कल्याणी, पांच वर्ष की कन्या रोहिणी, छह वर्ष की कन्या कालिका, सात वर्ष की कन्या चंडिका और आठ वर्ष की कन्या सुभद्रा कहलाती है। इससे अधिक अवस्थाओं वाली कन्या का पूजन नहीं करना चाहिए। नवरात्र में कन्या पूजन से नव निधि और सभी प्रकार की शक्ति एवं सुख समृद्धि प्राप्त होती है।
सिद्ध पीठों के दर्शन का विशेष महत्व
आचार्य पंडित सेमवाल ने बताया कि नवरात्र पर सिद्धपीठों, तीर्थ स्थलों के दर्शन से विशेष फल प्राप्त होता है। साथ ही गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है। तीर्थ स्थलों पर जाने से न केवल मनोकामना पूर्ण होती है बल्कि एक तीर्थ की यात्रा से हमारे भीतर का कोई न कोई विकार या बुराई समाप्त होती है।
नवरात्र में खाने पीने का रखें खास ख्याल
नवरात्र में व्रत के दौरान खाने पीने का खास ख्याल रखा जाना चाहिए। खास तौर से शुगर व ब्लड प्रेशर के रोगियों को खाने पीने में सावधानियां बरतनी चाहिए। फलाहार पर ज्यादा जोर देना चाहिए।
इन दिनों नवरात्र चल रहे हैं। इस दौरान नौ दिनों तक व्रत रखे जाते है। आम तौर पर व्रत के बीच में चिप्स, भुनी मूंगफली, साबूदाने के व्यंजन चौलाई आदि का सेवन लोग करते हैं। व्रत के अंत में सिंघाड़ा या कूट्टू के आटे की पूरी, पंराठे या पकौड़ी खाई जाती है। स्वास्थ्य की दृष्टि से देखा जाए तो ये सभी व्यंजन तले हुए रहते हैं और पेट व सेहत पर भारी पड़ सकते हैं। इसलिए व्रत के दौरान कुछ खास बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए ताकि सेहत ठीक रह सके। शरीर को ऊर्जा मिलती रहे इसके लिए प्रोटीन व कार्बोहाईड्रेट्स युक्त चीजें लेना जरुरी है। इसके लिए बादाम, अखरोट, मूंगफली आदि का सेवन करते रहना चाहिए। पानी व जूस का प्रयोग भी प्रचुर मात्रा में करना चाहिए। इससे शरीर में निर्जलीकरण होने से बचाव होता है। संतरा व मौसमी का इस्तेमाल करने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। इसके अलावा सलाद का सेवन भी किया जाना चाहिए। फिजिशियन डा. प्रवीण गोठी का कहना है कि शुगर व ब्लड प्रेशर के रोगियों को खास ख्याल रखना चाहिए। शुगर के रोगियों को अधिक समय तक भूखा नहीं रहना चाहिए। इसी तरह से तेज नमक व चिकनाई से ब्लड प्रेशर के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। उनका कहना है कि व्रत के अंत में कुट्टू या सिंघाड़े से बने व्यंजनों के बजाय सांवक के चावलों का प्रयोग करना बेहतर रहता है।
माता मनकामेश्वरी मंदिर में हुई पूजा अर्चना
पश्चिमी अंबर तालाब स्थित माता मनकामेश्वरी दुर्गा देवी मंदिर में चैत्र नवरात्र पर पंडित आदेश भारद्वाज ने मंत्रोच्चारण के साथ पूजा अर्चना पूर्ण कराई। इसके बाद मंदिर में भजन कीर्तन का आयोजन किया गया। इस दौरान रेखा जैन, अलका जैन, ईशा जैन, रंजनी कौशिक, सरला निम, पूनम, रानी यादव आदि मौजूद रही।