रुड़की/लंढौरा। बवाल पर काबू पाने से ज्यादा फुर्ती पुलिस ने चैंपियन के ताऊ को पकड़ने में दिखाई। जबकि चौथे दिन फरार आरोपियों की गिरफ्तारी होने पर यह साफ हो गया कि पूरा बवाल महज एक अफवाह पर भड़का। अफसर तो पहले दिन से यह मानकर चल रहे थे, फिर किस दबाव में चैंपियन के ताऊ को पुलिस को गिरफ्तार करना पड़ा। बवाल के बाद से यह सवाल भी उठ रहा है।
पुलिस के मुताबिक चैंपियन के ताऊ कृष्ण कुमार उनके किरायेदारों के बीच साझे के विवाद सुलझाने के लिए दुकान में पहुंचे थे। दुकान खाली कराने के लिए उन्होंने कुछ किताबें बाहर जरूर रखवाई थी लेकिन उनमें कोई धर्मग्रंथ था ही नहीं। ऐसे में चैंपियन के ताऊ पर लगे आरोप खुद- ब-खुद खारिज हो जाते हैं। बवाल के दिन घटनाक्रम पर गौर करें तो उपद्रवियों को खदेड़ने के बाद पुलिस के आला अफसर चैंपियन के ताऊ को गिरफ्तार करने रंगमहल पहुंच गए थे। जबकि वह शुरूआत से अपमान की बात को अफवाह मान रहे थे। उसके बाद भी गिरफ्तारी की जल्द क्यों दिखाई गई। बवाल को अंजाम तक पहुंचाने के पीछे सियासी साजिश के साथ ही इसमें भी राजनीतिक दखल की चर्चाएं हो रही हैं।
पुलिस पर लगाया तोड़फोड़ का आरोप
बवाल का शिकार हुए लोगों के साथ साथ अब पुलिस की कार्रवाई से आहत लोग भी तहरीर लेकर अफसरों तक पहुंच रहे हैं। उनका आरोप है कि बवाल थमने के बाद उपद्रवियों की तलाश में पुलिस उनके घरों तक पहुंची और मारपीट करते हुए घर में तोड़फोड़ की गई। पुलिस ने जनप्रतिनिधियों को भी निशाना बनाया।