रुड़की। पति के जेल जाने के बाद बच्चे को लेकर दर-दर भटक रही एक महिला को नारी उज्जवल जीवन ट्रस्ट की महिलाओं ने सहारा दिया है। ट्रस्ट की अध्यक्ष रक्षा वालिया ने बताया कि महिला नारी निकेतन जाने को तैयार नहीं थी, जिसके बाद उसकी हर तरह से देखभाल का निर्णय लिया गया है।
रुड़की से सटे एक गांव निवासी अन्नू ने करीब एक वर्ष पहले प्रेम विवाह किया था। इसके बाद दोनों के परिवारों ने उन्हें नहीं अपनाया। इस पर वे दोनों रुड़की में ही किराये के मकान में रहने लगे। शादी के करीब तीन माह बाद पति को रुड़की पुलिस ने किसी मामले में जेल भेज दिया। अन्नू ने बताया कि जिस समय पुलिस ने उसके पति को जेल भेजा तब वह गर्भवती थी। पति के जेल जाने के बाद कोई सहारा न होने के कारण उसने एक प्राइवेट कंपनी में काम करना शुरू कर दिया, लेकिन जब प्रसव का समय आया तो युवती के पास कोई अपना नहीं था। ऐसे में वह अकेली सरकारी अस्पताल पहुंची, जहां ऑपरेशन के बाद उसने एक बच्चे को जन्म दिया। कुछ दिन बाद जब युवती को अस्पताल से छुट्टी मिली तो वह अपने बच्चे को लेकर ससुराल पहुंची, लेकिन उससे गाली गलौज और मारपीट की गई। पीड़िता ने पुलिस और महिला हेल्पलाइन में भी मामले की शिकायत की, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका। इसके बाद किसी तरह अन्नू रुड़की सुभाषनगर स्थित महिलाओं के सामाजिक संगठन नारी उज्जवल जीवन ट्रस्ट तक पहुंची। यहां उसने ट्रस्ट की अध्यक्ष रक्षा वालिया को अपनी आपबीती बताई। रक्षा वालिया ने बताया कि अन्नू अपने बच्चे के साथ किसी नारी निकेतन में नहीं जाना चाहती थी। उसने ट्रस्ट के कार्यों में हाथ बंटाकर गुजर बसर करने की बात कही। इस पर ट्रस्ट ने उसे अपना लिया है और उसकी पूरी रेखदेख की जा रही है।