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लगे वेस्ट टू एनर्जी प्लांट, तो ही मिले कूड़े के पहाड़ से निजात

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वेस्ट टू एनर्जी प्लांट की राह शासन से टेंडर निकाले जाने के बाद भी आसान होती नहीं दिख रही है। टेंडर जारी होने के छह माह बाद भी अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। टेंडर जारी होने के बाद चुनाव आचार संहिता रोड़ा बनी थी लेकिन अभी मामला शासन में अटका हुआ है। इसके कारण सालियर स्थित नगर निगम की जमीन पर कूड़े के पहाड़ बन गए हैं। इनसे बीमारी फैलने का भी खतरा बना हुआ है। रुड़की शहर में रोजाना करीब 104 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है।
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कहने को रुड़की एक शिक्षा नगरी है और इसे इंजीनियरों के शहर नाम से भी जाना जाता है। इसके बावजूद राज्य गठन के बाद भी भाजपा और कांग्रेस की सरकारें यहां कूड़ा निस्तारण के लिए प्लांट नहीं लगा सकी है। वर्तमान में रुड़की के 40 वार्डों में रोजाना करीब 104 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। इस कूड़े को नगर निगम की गाड़ियों से सालियर स्थित नगर निगम की सैकड़ों बीघा जमीन में डंप कर दिया जा रहा है। इसके चलते यहां कूड़े के बड़े-बड़े पहाड़ बन गए हैं। इस कूड़े के निस्तारण के लिए करीब आठ साल पहले विधायक प्रदीप बत्रा ने कूड़े से बिजली बनाने वाले वेस्ट टू एनर्जी प्लांट का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इसके बाद तत्कालीन नगर निगम बोर्ड की ओर से भी प्रक्रिया पूरी की गई। शासन के आदेश पर इसके टेंडर निकाले गए लेकिन प्रक्रिया पूरी तरह से अमल में नहीं आ सकी। करीब ढाई साल से इस प्लांट के लिए नगर निगम ने टेंडर निकाला। इस प्लांट में अन्य निकायों से कूड़ा लाकर निस्तारण करना बड़ी समस्या थी। इसके चलते किसी कंपनी ने टेंडर नहीं लिया। इसके बाद नियम और शर्तों में ढील दी गई और प्लांट की क्षमता को 400 से घटाकर 200 मीट्रिक टन कर दिया गया। इसके बाद अक्तूबर 2021 में शासन ने टेंडर जारी किया लेकिन प्रक्रिया अब तक भी पूरी नहीं हो पाई है। स्थिति यह है कि रुड़की स्थित सालियर की जमीन में बने कूड़े के इन पहाड़ पर कूड़ा पहुंचाने के लिए पहले जेसीबी लगाकर रास्तों से कूड़ा हटाना पड़ता है। इस कूड़े से आसपास के ग्रामीण इलाकों में बीमारियां फैलने का भी खतरा बना हुआ है।
कूड़ा निस्तारण के साथ ही बिजली भी बनेगी
पूर्व में जारी हुए टेंडर की शर्तों के अनुसार रुड़की कलस्टर के तहत आने वाले लक्सर, लंढौरा, झबरेड़ा, कलियर आदि निकायों का कूड़ा यहां लाया जाएगा। इससे पहले हरिद्वार और कोटद्वार तक कूड़ा एकत्र करने की योजना थी। इस प्लांट के निर्माण को हरी झंडी मिलती है तो इससे न केवल कूड़े का निस्तारण हो सकेगा बल्कि दो मेगावाट विद्युत उत्पादन भी होगा।
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स्वच्छता रैंकिंग में भी रुड़की को मिलती बढ़त
रुड़की के पास अपना कूड़ा निस्तारण प्लांट होता तो स्वच्छता रैंकिंग में भी बढ़त मिलती। हालांकि इससे पहले रुड़की निगम दो बार प्रदेश में पहली रैंक पर आ चुका है लेकिन अब दूसरे पायदान पर है। माना जा रहा है कि कूड़ा निस्तारण प्लांट लगने के बाद रुड़की स्थायी रूप से प्रदेश की रैंकिंग में सबसे आगे हो जाएगा।
शासन की ओर से करीब छह माह पूर्व टेंडर जारी किया गया था। अब तक टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। शहर के लिए यह आवश्यक है। इसके बारे में शासन से जानकारी ली जाएगी। जल्द ही इस काम को शुरू कराया जाएगा।
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-गौरव गोयल, मेयर नगर निगम रुड़की
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