रुड़की। किसान पर हमला करने वाले गुलदार की मौत वन विभाग के दावों के उलट भारी धारदार हथियार के वार से हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसका खुलासा होने के बाद अब मौत के अन्य कारणों का पता लगाने के लिए गुलदार के विसरे को जांच के लिए भेज दिया गया है।
पिछले सप्ताह सोलानी नदी के पास स्थित गेहूं के खेत में काम कर रहे एक किसान पर गुलदार ने हमला कर दिया था। जैसे-तैसे करके किसान ने अपनी जान बचाकर ग्रामीणों को हमले की जानकारी दी थी। सूचना पर ग्रामीणों एवं वन विभाग के अधिकारियों ने गुलदार की खोजबीन की लेकिन वह गेहूं के खेत में मरा पड़ा मिला था। उस दौरान वन विभाग के अधिकारियों ने दावा किया था कि गुलदार की मौत दूसरे गुलदार के साथ संघर्ष होने से हुई है। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसकी पुष्टि नहीं हुई है। पोस्टमार्टम करने वाले पशु चिकित्सक डा. निशांत सैनी ने बताया कि गुलदार पर किसी भारी धारदार हथियार से हमला किया गया था। उसके पीछे के पैरों के पंजे भी कटे हुए मिले थे। उन्होंने बताया कि पीएम रिपोर्ट वन विभाग अधिकारियों को भेजने के साथ गुलदार के विसरे को जांच के लिए भेज दिया गया है।
इनका कहना है
अभी उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिली है। लेकिन संभव है कि जिस किसान को गुलदार ने जख्मी किया था उसने अपने बचाव में उस पर धारदार हथियार से हमला कर दिया हो। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
जीआर पांडे, रेंजर, रुड़की क्षेत्र
खेतों में गुलदार के पंजों के निशान से दहशत
रुड़की। शहरी क्षेत्रों में गुलदार की दस्तक के बाद ग्रामीणों में दहशत है। स्थिति यह है कि लोगों की गेहूं की फसल पककर तैयार है, लेकिन वे कटाई को नहीं जा पा रहे हैं। यही नहीं दिहाड़ी मजदूर भी खेतों की ओर जाने को तैयार नहीं है। ग्रामीणों ने वनविभाग से पिंजरा लगाकर गुलदार के खौफ से निजात दिलाने की गुहार लगाई है।
रामपुर क्षेत्र में एक पखवाड़े के भीतर लगातार दो बार गुलदार की आमद से क्षेत्रवासियों में खौफ है। पहली बार एक बुजुर्ग पर हमला कर गुलदार ने मौत के घाट उतार दिया, जबकि एक अन्य ग्रामीण को गंभीर रूप से जख्मी कर दिया था। घटना के बाद एक मृत गुलदार मिलने से लोगों ने राहत की सांस ली थी। उन्हें उम्मीद थी कि आदमखोर गुलदार का अंत हो गया, लेकिन चंद दिनों बाद ही रामपुर के दूसरे किनारे पर एकबार फिर गुलदार ने दस्तक दी। साथ ही एक व्यक्ति को मौत के घाट उतार दिया। आसपास मिले गुलदार के पैरों के निशान दहशत की कहानी बयां कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार रामपुर के जंगल में जहां गुलदार ने एक व्यक्ति को मारा है। उससे थोड़ी दूर पर अलवर नामक ग्रामीण का ट्यूबवेल हैं, जहां दो गुलदारों के पैरों के निशान हैं। इसमें एक छोटा है, जबकि दूसरा बड़ा है। अंबर तालाब निवासी मोहम्मद इकराम, मो. साहिल, फरमान और हाजी मोबीन का कहना है कि रामपुर के जंगल क्षेत्र में उनकी खेती है, लेकिन गुलदार की दहशत से वे खेतों का रुख नहीं कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि गेहूं की फसल पककर तैयार है, लेकिन कटाई के लिए कोई मजदूर भी राजी नहीं हो रहा है। उन्होंने वनविभाग से क्षेत्र में पिंजरा लगाकर गुलदार की दहशत से निजात दिलाने की मांग की है। इस संबंध में रुड़की क्षेत्र के रेंजर जीआर पांडे का कहना है कि गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने सहित अन्य एहतियाती उपाय किए जा रहे हैं।