रजवाहे की पटरी टूटने से बह रहे पानी को रोकते ग्रामीण
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सरकी रजवाहे की पटरी बह जाने से आसपास के खेतो में पानी भर गया। पटरी टूटने का पता चलने पर लोगों ने खुद ही पटरी पर अवरोध व मिट्टी के जरिये पानी रोकने मेें सफलता हासिल की। इससे पानी ज्यादा बड़े इलाके में नहीं फैल सका।
सरकी रजवाहे की कमजोर पटरी क्षेत्र के किसानों के लिए मुसीबत का सबब बन रही है। मगंलवार की सुबह करीब साढ़े छह बजे एक ओर की पटरी बह गई। कमजोर हो चुकी पटरी में देखते ही देखते काफी चौड़ी दरार बन गई। इसका पता चलते ही मुस्तकीम, कलीम, मुरसलीम, जावेद आदि लोगों ने पुरानी टीन की चादर व मिट्टी डालकर दरार को बंद करने का प्रयास किया। इसके बावजूद थोड़ा पानी रिसता रहा। इन लोगों का कहना है कि कमजोर पटरी होने के बावजूद रजवाहे में ज्यादा पानी छोड़ा गया। इससे पटरी का कमजोर हिस्सा बह गया। बाद में रजवाहा की पटरी बहने की सूचना सिंचाई विभाग के कर्मियों को दी गई। गौरतलब है कि पिछले चार महीनों में रजवाहे की पटरी बहने की यह तीसरी घटना है। इससे पहले ईद से ठीक पहले ईदगाह की तरफ वाली पटरी बह गई थी। बड़ी मुश्किल से ईदगाह से पानी निकालकर ईद की नमाज अदा कराई गई थी।
सिंचाई विभाग की लापरवाही पड़ रही भारी
तीन साल पहले रजवाहे के पुराने पुल के बराबर में नया पुल बनाया गया था। तब पुल से हाईवे तक पटरी को पक्का कर सीसी रोड बना दी गई थी। लेकिन अभी आसफनगर मोड़ से पुल तक दोनों ओर की पटरी कच्ची है। देखभाल के अभाव में पटरी खस्ता हालत में है। पटरी का कटाव होने से यह कभी भी बह जाती है। इसकी देखभाल व रखरखाव की जिम्मेदारी सिचंाई विभाग की है। परवेज, इरफान आदि का कहना हैं कि पटरी को पक्का कराए जाने से बहने की समस्या हल हो सकती है।