लाखों रुपये के भ्रष्टाचार का मामला ठंडा बस्ते में जाता दिखाई दे रहा है। महीनों की जांच के बाद भी 30-32 लाख रुपये कहां गायब हो गए, यह सवाल अब भी बरकरार है। उपभोक्ता से की गई वसूली की रकम विभाग में जमा नहीं हो पाई जबकि विजिलेंस ने छापा मारकर कैश बुक, बिल रसीद व अन्य दस्तावेज जांच के लिए कब्जे में लिए थे।
जनवरी में जल संस्थान की विजिलेंस ने पानी के बिलों में गड़बड़ी और आर्थिक भ्रष्टाचार की शिकायत पर कार्यालय पर छापा मारा था। शिकायत थी कि यहां पर उपभोक्ता से की गई वसूली का पैसा जमा नहीं कराया गया है। बिल और डाटा एंट्री आदि अभिलेखों में लाखों रुपये की हेराफेरी थी।
यह मामला करीब 30-32 लाख के गबन से जुड़ा था। छापे के बाद से ही मामला अब तक ठंडा बस्ते में पड़ा है। अब तक इस मामले में कोई भी कार्रवाई होती नहीं दिखी है। मुख्य महाप्रबंधक डीके सिंह ने बताया कि विजिलेंस ने उन्हें अभी जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी है। रिपोर्ट लंबित किन कारणों से हुई है इस संबंध में जानकारी ली जाएगी।
जांच रिपोर्ट के आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी ओर एई प्रवेज आलम ने बताया कि कार्यालय में विजिलेंस के छापे की उन्हें जानकारी है। कार्रवाई के दौरान विजिलेंस ने रसीदों में हेरफेर होने के दौरान यहां तैनात अधिकारी एवं कर्मचारियों की जानकारी ली थी। इसके अलावा उनसे कैश बुक और बिल रसीद आदि संबंधी जानकारियां मांगी गई थी जो वह शाखा को उपलब्ध करा चुके हैं। अब इस संबंध में क्या अपडेट है उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
2022 से चल रही थी गड़बड़ी
लाखों रुपये का यह भ्रष्टाचार 2022 से चल रहा था। तत्कालीन कर्मचारी इस संबंध में स्थानीय अधिकारी को शिकायत भी कर चुके थे लेकिन लिखित शिकायत के बावजूद भी स्थानीय स्तर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। केवल मामूली माफीनामे के बाद मामले को रफादफा कर दिया गया था।