ग्रामीणों ने विभाग पर लगाया लापरवाही बरतने का आरोप
डेंगू का डंक अब जानलेवा हो रहा है। मंगलवार को डेंगू से मेहवड़ गांव निवासी भाजपा कार्यकर्ता समेत दो युवकों की मौत हो गई। मेहवड़ में डेंगू और बुखार से अब तक पांच मौतें हो चुकी हैं। इनमें एक बच्ची भी शामिल है। रुड़की क्षेत्र में अब तक आठ लोगों की जान जा चुकी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक इनकी पुष्टि नहीं की गई है। वहीं भगवानपुर के खेड़ी शिकोहपुर में तीन संदिग्ध मरीजों ने भी दम तोड़ दिया है।
मेहवड़ गांव निवासी एवं भाजपा के युवा कार्यकर्ता अंकित सैनी को कुछ दिन पूर्व बुखार हुआ था। उन्हें शहर के एक नामी अस्पताल में ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर सोमवार रात को चिकित्सक ने उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया। इसके चलते परिवार के लोग उन्हें मेरठ के एक अस्पताल ले गए। वहां मंगलवार सुबह उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
दो सप्ताह पहले अंकित सैनी की भाभी की भी बुखार से मौत हो गई थी। इसी गांव के अजय कश्यप को भी बुखार हुआ था। परिवार के लोग अजय को एक निजी अस्पताल ले गए थे। मंगलवार सुबह अजय कश्यप की उपचार के दौरान मौत हो गई। बताया गया कि उनको भी डेंगू ही था। एक ही दिन में गांव में डेंगू से दो मौत होने से गांव में मातम छाया हुआ है। साथ ही डेंगू के प्रकोप से ग्रामीण दहशत में हैं।
गांव निवासी अभिषेक, अश्वनी व राकिब ने बताया कि गांव में डेंगू का प्रकोप है। 50 से अधिक ग्रामीण विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। उनकी हालत गंभीर है। अजय और अंकित के अलावा इसी गांव में तीन और मौतें बुखार से हो चुकी है। चार दिन पहले एक किशोरी की मौत भी बुखार से ही हुई है। इससे पहले तीन अगस्त को एक बच्ची की मौत हुई थी।
पांच लोगों की मौत हो चुकी है लेकिन गांव में कोई फॉगिंग या फिर दवाओं का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी केवल एक बार ही शिविर लगाया गया है। जिस तरह से गांव में डेंगू का प्रकोप है। उसको देखते हुए डेंगू से बचाव को लेकर प्रशासन की ओर से गंभीरता से प्रयास किए जाने चाहिए।
सीएमएस ने किया डेंगू वार्ड का निरीक्षण
सिविल अस्पताल रुड़की के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय कंसल ने डेंगू वार्ड का निरीक्षण किया। उन्होंने स्टाफ में साफ-सफाई की पूरी व्यवस्था रखे जाने के निर्देश दिए। साथ ही मरीजों से भी उनका हालचाल जाना। उन्होंने कहा कि डेंगू वार्ड में मरीज के साथ परिवार का केवल एक ही सदस्य रहे। वार्ड में भीड़ न करें। इससे इंफेक्शन का खतरा रहता है। उन्होंने चिकित्सकों से कहा कि बुखार के भर्ती सभी मरीजों की प्लेटलेट्स की जांच कराते रहें। चाहे मरीज को डेंगू हो या न हो। उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
रैपिड जांच में 17 बुखार पीड़ितों में डेंगू की पुष्टि
सिविल अस्पताल रुड़की में मंगलवार को भी बुखार पीड़ित मरीजों की भीड़ रही। बुखार पीड़ित 30 मरीजों की डेंगू जांच कराई गई। इसमें तीन मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। इसके अलावा निजी अस्पताल व पैथोलॉजी लैब से प्राप्त जानकारी के मुताबिक 14 मरीजों की डेंगू रैपिड जांच पॉजिटिव आई है। मरीजों का उपचार चल रहा है। तीन मौतों से दहशत में हैं ग्रामीण भगवानपुर क्षेत्र के खेड़ी शिकोहपुर गांव में संदिग्ध बुखार से मंगलवार सुबह 72 वर्षीय दिलशाद की मौत हो गई। दिलशाद का एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था। सोमवार शाम को संदिग्ध बुखार से ही 68 वर्षीय हसीना एवं एक अन्य महिला की मौत हो गई है। खेड़ी शिकोहपुर गांव में इससे पहले संदिग्ध बुखार से एक किशोर समेत दो मौत हो चुकी हैं। गांव में संदीप बुखार का प्रकोप है। बड़ी संख्या में ग्रामीण बुखार की चपेट में है। जिनका विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है। गांव में 10 दिन के भीतर ही संदिग्ध बुखार से पांच मौत होने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।