राजकीय संयुक्त चिकित्सालय रुड़की में दो डाक्टरों के बीच हुए विवाद के मामले में बुधवार को एक चिकित्सक ने ओपीडी में ताला जड़ दिया। करीब तीन घंटे तक ओपीडी बंद रहने से मरीज इलाज के लिए भटकते रहे। जबकि इस दौरान अस्पताल प्रबंधन पूरी तरह बेखर रहा। शिकायत पर सीएमएस के निर्देश पर ओपीडी कक्ष खोला गया। तब जाकर मरीजों ने राहत की सांस ली।
सिविल अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. राजकुमार की ज्वाइनिंग को लेकर चल रहा विवाद तूल पकड़ता जा रहा है। बीते रोज ज्वाइनिंग देने के बाद ओपीडी कक्ष में बैठने को लेकर दूसरे हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. पीएके दुबे ने एतराज जता दिया था। उस दौरान दोनों के बीच कहासुनी और नोकझोंक भी हो गई थी। बुधवार सुबह करीब आठ बजे डा. दुबे अस्पताल पहुंचे और ओपीडी कक्ष में ताला लगा दिया।
उसके बाद ड्यूटी करने पहुंचे डा. राजकुमार ओपीडी पहुंचे। लेकिन ताला लगा होने पर बैरंग लौट गए। डा. दुबे के भी न बैठने से हड्डी रोग से संबंधित मरीज घंटों तक ओपीडी के बाहर खड़े रहे। उसके बाद परेशान लोगों ने इसकी सूचना कार्यवाहक सीएमएस डा. संजय कंसल को दी। उन्होंने ओपीडी कक्ष का ताला खुलवाने के निर्देश दिए। तीन घंटे के बाद सुबह करीब 11 बजे ओपीडी में डा. दुबे बैठे तब जाकर मरीजों का इलाज शुरू हो पाया। जबकि ओपीडी में ताला लगा देखकर डा. राजकुमार ने देहरादून का रुख किया और स्वास्थ्य महानिदेशक को मामले से अवगत कराया। उन्होंने बताया अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें अभी अटेडेंस रजिस्टर भी उपलब्ध नहीं कराया है।
हड्डी रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में डा. पीके दुबे ने ताला लगा दिया था। लेकिन इसकी जानकारी मुझे नहीं थी। मामला संज्ञान में आने के बाद ताला खुलवाकर ओपीडी शुरू कराने के निर्देश दिए गए। डा. राजकुमार की अभी ज्वाइनिंग नहीं हुई है। यही कारण है कि उन्हें ओपीडी में बैठने और ड्यूटी रजिस्टर में साइन करने की अनुमति नहीं दी गई है।
डा. संजय कंसल, कार्यवाहक सीएमएस
19 दिन बाद पटरी पर लौंटी स्वास्थ्य सेवाएं
एनएचएम कर्मियों का आंदोलन समाप्त
अमर उजाला ब्यूरो
रुड़की/लक्सर। नेशनल हेल्थ मिशन-एनएचएम संविदाकर्मियों की 19 दिन से चली रही हड़ताल मंगलवार रात वार्ता के बाद समाप्त हो गई। बुधवार से रुड़की सिविल अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं पटरी पर लौट आईं। रुड़की सिविल अस्पताल में अब डीआईसी सेंटर का संचालन शुरू हो गया है। साथ ही पैथोलाजी में भी अब जांच दोपहर डेढ़ बजे तक कराई जा सकेगी।
मंगलवार शाम प्रदेश सरकार ने एनएचएम कर्मियों की मांगों पर सहमति जताते हुए 20 दिन में सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया। उसके बाद कर्मियों ने 19 दिनों से चला आ रहा अपना आंदोलन समाप्त करने का एलान कर दिया। उसके बाद बुधवार को स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर लौट आईं। इसके तहत अब रुड़की सिविल अस्पताल में डीआईसी सेंटर भी शुरू हो सकेगा। इसमें विशेष बच्चों का उपचार किया जाता है, लेकिन पिछले 19 दिनों से अधिकतर एनएचएम कर्मियों के आंदोलन पर जाने से सेवाएं पूरी तरह ठप थी। एनएचएम कर्मियों के सामूहिक बहिष्कार से पैथोलाजी जांच भी प्रभावित हो रही थी। कर्मियों के वापस लौटने से अब मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के कार्य को गति मिलेगी। बुधवार को लक्सर और खानपुर में एनएचएम कर्मियों के कार्य पर लौटने से स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु हो सकेंगी। लक्सर के एनएचएम कर्मी देवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री की ओर से नियमितीकरण की सुविधाएं और अन्य मांगों पर सहमति जता दी है।