चीनी मिल का पेराई सत्र शुरू हुए ढाई माह से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन अब तक शासन ने न्यूनतम गन्ना मूल्य घोषित नहीं किया है। गन्ना किसान फिलहाल अपनी फसल का दाम जाने बिना ही मिल को आपूर्ति कर रहे हैं। किसान गन्ना मूल्य की घोषणा के लिए सरकार की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। न्यूनतम गन्ना मूल्य घोषित होने में देरी से किसानों में बेचैनी है।
लक्सर चीनी मिल का पेराई सत्र बीते वर्ष सात नवंबर को शुरू हुआ था। मिल के गन्ना क्रय केंद्रों पर चार नवंबर से गन्ने की खरीद शुरू हो गई थी लेकिन अब तक गन्ना मूल्य घोषित नहीं किया गया है। किसान संगठनों की ओर से सरकार से गन्ना मूल्य में घोषित करने की मांग की जा रही है लेकिन अब तक न्यूनतम गन्ना मूल्य घोषित नहीं किया गया है।
पिछले पेराई सत्र में सरकार ने प्रदेश में सामान्य प्रजाति के लिए 365 रुपये प्रति क्विंटल और अगेती प्रजाति के लिए 375 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया था। चालू पेराई सत्र में चीनी मिल पुराने गन्ना मूल्य के आधार पर ही किसानों को अग्रिम भुगतान कर रही है। स्थानीय किसान राकेश कुमार, बबलू, कमल, प्रवीण का कहना है कि पेराई सत्र शुरू हुए ढाई माह का समय हो चुका है लेकिन सरकार ने अब तक गन्ना मूल्य घोषित नहीं किया है। सरकार को पेराई सत्र आरंभ होने से पहले ही न्यूनतम गन्ना मूल्य घोषित कर देना चाहिए ताकि किसानों को पता रहे कि वह किस कीमत पर अपना गन्ना मिल को बेच रहे हैं।
चालू पेराई सत्र में 72 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई
चालू पेराई सत्र में लक्सर चीनी मिल अब तक 72 लाख क्विंटल से अधिक गन्ने की पेराई कर चुकी है। गन्ना भुगतान के मामले में लक्सर चीनी मिल जनपद की दूसरी चीनी मिलों से बेहतर स्थिति में है। लक्सर चीनी मिल प्रबंधन की ओर से चालू पेराई सत्र में 20 जनवरी तक 262.91 करोड़ का भुगतान किसानों को किया जा चुका है।