शनिवार को मकर राशि में प्रवेश करते ही सूर्य देव उत्तरायण हो जाएंगे। इसके चलते मकर संक्रांति का पर्व इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है कि भगवान सूर्य अपने पुत्र शनिदेव की राशि मकर में शनिवार के दिन आ रहे हैं। ऐसे में मकर संक्रांति पर दान और स्नान करने से शनिदेव की पीड़ा से ग्रसित व्यक्तियों को भी विशेष लाभ मिलेगा।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार मकर संक्रांति का पर्व स्नान और दान से न केवल भगवान सूर्य की कृपा प्राप्त होगी बल्कि शनिदेव की पीड़ा से ग्रसित व्यक्तियों को भी लाभ मिलेगा। ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश शुक्ला ने बताया कि शनिवार को बृहस्पति पर शनिदेव की पांचवीं दृष्टि है। जो अपने आप में शुभ है। वहीं सूर्यदेव के उत्तरायण होकर मकर राशि में प्रवेश करने पर पडने वाले मकर संक्रांति का पर्व शनिवार को होने से इसका महत्व बढ़ गया है। क्योंकि इस दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। साथ ही शनिवार का भी दिन है। इससे शनिवार को पूजा अर्चना से सूर्य और शनिदेव की कृपा प्राप्त होगी। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। शास्त्रों में इस दिन मां गंगा के अवतरण का दिन भी माना जाता है। मकर संक्रांति पर काली उड़द की खिचड़ी का प्रसाद बांटने और घर में खिचड़ी बनाकर इसका सेवन करने का नियम है। माघ माह में खिचड़ी के खाने से आरोग्यता प्राप्त होती है।