आचार संहिता लगते ही क्षेत्र की शुगर मिलों ने बकाया न देने के लिए चुप्पी साध ली है। चार जनवरी से मिलों की ओर से कोई भुगतान नहीं किया गया। इकबालपुर शुगर मिल तो पिछले साल के तीन करोड़ रुपये के भुगतान पर भी कुंडली मारकर बैठी हुई है। जबकि नया भुगतान एक भी रुपये नहीं दिया है।
वैसे तो तीनों चीनी निजी मिलें समय से किसानों को भुगतान नहीं कर रही है लेकिन, जब से विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लगी है तब से किसी मिल की ओर से भुगतान नहीं किया है। लक्सर मिल को छोड़कर इकबालपुर एवं लिब्बरहेड़ी शुगर मिल की ओर से कोई भुगतान नहीं किया है। जबकि किसानों का गन्ना सभी मिलें धड़ाधड़ उधारी में लेकर पेराई कर रही हैं। अभी तक एक-एक मिल करोड़ों रुपये का गन्ना खरीद चुकी है लेकिन, आचार संहिता लगने के बाद से भुगतान करने में कंजूसी की जा रही है। इकबालपुर मिल तो नए सत्र का एक नये पैसे का भुगतान नहीं कर पाई है। जबकि पिछले साल का करीब तीन करोड़ रुपये का अंतर भुगतान भी दबाकर बैठी हुई है। मिलों की इस मनमानी के चलते किसानों को अपना गन्ना बेचने के बाद भी पाई-पाई को तरसना पड़ रहा है।
शुगर मिलों को लगातार भुगतान के लिए पत्र लिखे जा रहे हैं। उम्मीद है कि लिब्बरहेड़ी मिल एक-दो दिन में भुगतान कर दे। इकबालपुर मिल की ओर से भी जल्द अंतर एवं नया भुगतान कराया जाएगा।
आशीष कुमार नेगी, सहायक गन्ना आयुक्त, हरिद्वार