रुड़की में जिस तरह से एक एटीएम में पिन कैप्चरिंग डिवाइस और पिन हॉल कैमरे लगे होने के निशान पाए गए हैं। ठीक इसी तर्ज पर यूएसए में सैकड़ों मामले सामने आ चुके हैं। यूरोप के कई देशों में भी इस तरह की घटनाएं सामान्य बात हो चली है। इससे आशंका पैदा हो रही है कि स्थानीय एटीएम हैकर्स के तार यूएसए सहित यूरोप के कई देशों के चल रहे नेटवर्क से हो सकते हैं। आशंका जताई जा रही है कि पढ़े लिखे आईटी एक्सपर्ट इंटरनेट के जरिए इस नेटवर्क से जानकारी और सामान हासिल कर रहे हैं।
यूएसए में ऐसे हजारों मामले सामने आए हैं, जिसमें बैंक उपभोक्ताओं के खातों से उनके बिना कोई जानकारी दिए एकाउंट से रकम उड़ा ली गई। जिसके बाद जांच में यह बात सामने आई थी कि एटीएम मशीन में स्कीमिंग डिवाइस, पिन कैप्चरिंग डिवाइस तथा ब्राउचर पिन हॉल कैमरा लगा हुआ पाया गया। यूएसए की सीक्रेट एजेंसी की ओर से इंटरनेट पर जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक एटीएम हैकर्स 2008 में एक लाख बिलियन डॉलर की ठगी कर चुके हैं। जबकि इस अवधि में दस हजार से अधिक ठगी के मामले सामने आ चुके हैं। ठीक इसी तरह लालकुर्ती के एटीएम में भी कैमरा और डिवाइस लगने होने की बात सामने आ चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि इसमें पढ़े लिखे आईटी एक्सपर्ट युवाओं का गिरोह हो सकता है। जो इंटरनेट के माध्यम से विदेशों में इस नेटवर्क को संचालित कर रहे गिरोह के संपर्क में हैं। जानकारों के मुताबिक एटीएम पिन कैप्चरिंग के जरिए जितने कार्डों की जानकारी हैकर्स जुटा चुके हैं, उनसे संबंधित खातों की सुरक्षा आसान काम नहीं है। ऐसे में पुलिस और बैंक प्रशासन के लिए इस हाईटैक ठगी को रोकना सबसे बड़ी चुनौती है।
सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। इस बात की भी जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क के तार किन लोगों से जुड़े हुए हैं।
-- स्वप्न किशोर सिंह, सीओ