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किरायेदार ने फर्जी बेनामा बनाकर बेच दिया मकान

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नगर के मोहल्ला कानूनगोयान में एक किरायेदार ने अपने मकान मालिक का लाखों के मकान का फर्जी बेनामा बनाकर उसे किसी दो व्यक्तियों को बेच दिया। खरीदारों ने नगर निगम के हाउस टैक्स विभाग से मिलीभगत कर पहले मालिक का नाम कटवाकर अपना नाम दर्ज कर लिया। मामला सामने आने पर खुद को फंसता देख विभाग ने रजिस्टर में पहले मालिक का नाम ही दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं शहर विकास निदेशालय ने भी मामले में नगर निगम से रिपोर्ट मांगने और जांच बैठाने की बात कही है।
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मोहल्ला कानूनगोयान निवासी पंकज सिंघल ने बताया कि उनके मकान में एक किराएदार 30 साल से रह रहा था। बताया कि यह मकान उनकी दादी कलावती देवी के नाम पर दर्ज था। आरोप है कि चार जून को किराएदार ने मकान के फर्जी कागज बनवाकर धोखे से उक्त मकान को दो लोगों को बेच दिया। मामले का खुलासा तब हुआ जब उक्त मकान को अपनी मां के नाम दर्ज कराने के लिए दो दिन पहले नगर निगम के हाउस टैक्स विभाग में गए थे। जहां उन्होंने हाउस टैक्स विभाग के कर्मचारियों को उक्त रजिस्टर का क्रमांक दिखाया। हाउस टैक्स का रजिस्टर देखने पर पता चला कि उसमें ओवर राइटिंग कर उनकी दादी की नाम की जगह दो अन्य लोगों के नाम दर्ज थे। जब उन्होंने आपत्ति दर्ज की तो नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी एकत्रित हो गए। इसके बाद अधिकारियों ने कागजों की जांच की। इसमें विभाग की गड़बड़ी सामने आई। उन्होंने विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए। इसके बाद नगर निगम प्रशासन ने पीड़ित से एक हजार रुपये लेकर मकान के नाम परिवर्तन करने के लिए शुल्क जमा करवाया। साथ ही नगर निगम प्रशासन की ओर से मामले की सूचना पुलिस को दी गई है।
कुछ कर्मचारियों पर शक की सुई
बताया जा रहा है कि हाउस टैक्स के रजिस्टर में ओवर राइटिंग कर नाम बदलने के मामले में कुछ कर्मचारियों पर शक की सुई जा रही है। भले की नगर निगम प्रशासन इस मामले में आंतरिक जांच कराने की बात कह रहा है, लेकिन जांच के बाद ही कर्मचारियों के नाम सामने आएंगे। उसके बाद उन कर्मचारियों पर कार्रवाई होनी तय है।
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जांच हो तो होंगे कई मामले उजागर
यदि हाउस टैक्स विभाग के रजिस्टरों की ढंग से जांच की जाए को कई और मामले उजागर होंगे। अब यह मामला हाईलाइट होने के बाद अधिकारियों का फोकस भी टैक्स विभाग की ओर हो रहा है। इस मामले में भी सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि किस आधार पर ओवर राइटिंग कर किसी दूसरे व्यक्ति का नाम दर्ज कर दिया गया है।
ऐसे होता है नाम परिवर्तन
यदि किसी भवन स्वामी ने अपना मकान दूसरे पक्ष को बेच दिया तो दूसरा पक्ष भवन स्वामी के संबंधित बैनामा की फोटो कापी शपथपत्र के साथ नगर निगम में जमा कराएगा। कागजातों की जांच के बाद नगर निगम मकान स्वामी यानी दूसरे पक्ष से एक हजार का शुल्क लेता है। इसके बाद मकान बेचने वाले और खरीदने वाले का नाम दो राष्ट्रीय स्तर के समाचार पत्रों में प्रकाशित किए जाते हैं। उसके बाद 15 दिन के अंदर आपत्ति दर्ज करने को कहा जाता है। यदि इस प्रक्रिया के बिना कोई नाम बदला जाता है तो वह फर्जी ही कहलाता है।
शहर विकास निदेशालय ने भी लिया संज्ञान
नगर निगम रुड़की हाउस टैक्स के रजिस्टर में ओवर राइटिंग कर मूल मकान मालिक के नाम को मिटाकर दूसरे के नाम दर्जकर करने का मामला हाईलाइट होने के बाद शहरी विकास निदेशालय ने भी मामले का संज्ञान लिया है। शहरी विकास निदेशालय के अपर निदेशक अशोक कुमार पांडेय ने मामले को गंभीर बताते हुए नगर निगम प्रशासन रुड़की से मामले की रिपोर्ट तलब कर जांच कराने की बात कही है।
मामला संज्ञान में आने पर नगर निगम प्रशासन ने मामले की आंतरिक जांच कराई है। इसके बाद मामले की सूचना सिविल लाइंस पुलिस को दे दी गई है। जांच आदि पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई पूरी की जा सकती है।
- चंद्रकांत भट्ट, सहायक नगर आयुक्त नगर निगम रुड़की
मैं अभी देहरादून में हूं। हाउस टैक्स के रजिस्टर में किसी प्रकार की ओवर राइटिंग होने की जानकारी नहीं है। वापस आने के बाद ही मामले में कुछ कहा जा सकता है।
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- मामचंद, वरिष्ठ सहायक, हाउस टैक्स के लिपिक
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