शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा चुकी है। शहर की हर सड़क और चौराहे पर सुबह से शाम तक जाम लगा रहता है। यह स्थिति तब है जब शहर के सात चौराहों पर ट्रैफिक लाइटें लगी हुई हैं, लेकिन पुलिस प्रशासन की सुस्ती के चलते एक वर्ष से लाइटें शोपीस बनी हुई हैं।
शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए शहर के प्रमुख चौराहों पर एक साल पहले 90 लाख रुपये खर्च कर ट्रैफिक लाइटें लगाई गई थी, लेकिन इन लाइटों का संचालन अभी तक नहीं हो पाया है। न चौराहों पर पुलिस और ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की पूरी व्यवस्था है। यही वजह है कि शहर में दिन निकलने के साथ जाम की जो समस्या शुरू हो जाती है वह रात नौ बजे तक भी समाप्त नहीं होती है। चौराहों पर लगी ट्रैफिक लाइटें हास्यस्पद बनी हुई है। कभी कोई चालक लाइटों के अनुसार चलने का प्रयास करता है तो वह खड़ा ही रह जाता है, क्योंकि लाइटें तो जल रही है। लेकिन उनका कोई समय निर्धारित नहीं है। न लाइटों के अनुसार यातायात संचालन के लिए कोई पुलिसकर्मी वहां मौजूद रहता है। जिसके कारण चालक अपनी मनमर्जी से चौराहों को क्रास करने की कोशिश करते हैं और अपने वाहनों को जल्द निकालने के चक्कर में जाम लगा देते हैं। पूरा दिन शहर के तमाम चौराहों पर यातायात व्यवस्था इसी तरह से ध्वस्त होती रही है, लेकिन कोई पुलिसकर्मी या फिर ट्रैफिक पुलिसकर्मी सुध नहीं लेता। जिसके कारण लोग पूरा दिन जाम में फंसे रहते हैं।
इन चौराहों पर जाम
आजादनगर चौक, रामनगर चौक, बीएसएम तिराहा, मालवीय चौक, गणेशपुर पुल, प्रेममंदिर-खंजरपुर चौराहा, मलकपुर चुंगी।
ट्रैफिक लाइटों का संचालन जल्द शुरू किया जा रहा है। इसके लिए सीपीयू को बुलाया जा रहा है। इनका संचालन होने के बाद जाम की समस्या से लोगों को निजात मिल जाएगी।
बिपेंद्र कुमार सिंह, निरीक्षक, यातायात पुलिस, रुड़की।